परिचय

भारतीय संविधान समय के साथ विभिन्न संशोधनों के माध्यम से विकसित हुआ है, ताकि बदलती राजनीतिक, प्रशासनिक और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को समायोजित किया जा सके। 10वां संविधान संशोधन अधिनियम 1961 राष्ट्र निर्माण की इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण था। इस संशोधन के माध्यम से दादरा और नगर हवेली को औपचारिक रूप से भारतीय संघ में एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सम्मिलित किया गया। यह संशोधन उपनिवेशवाद से मुक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में उठाया गया एक संवैधानिक कदम था।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

स्वतंत्रता के बाद भारत के समक्ष विभिन्न प्रकार के क्षेत्रीय प्रश्न थे। कुछ क्षेत्र पूर्व रियासतें थीं, जबकि कुछ विदेशी शासन के अधीन थे। दादरा और नगर हवेली पुर्तगाल के नियंत्रण में था, जबकि भौगोलिक रूप से यह महाराष्ट्र और गुजरात से घिरा हुआ था।

1954 में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों ने पुर्तगाली शासन से इस क्षेत्र को मुक्त कराया। 1954 से 1961 तक इसका प्रशासन स्थानीय परिषद द्वारा संचालित हुआ, किंतु इसका संवैधानिक दर्जा स्पष्ट नहीं था। भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से भारतीय संघ में शामिल करने का निर्णय लिया, जिसके लिए संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन आवश्यक था।

वर्तमान परिदृश्य

दादरा और नगर हवेली का एकीकरण बाद में गोवा, दमन और दीव के एकीकरण का आधार बना। 2020 में प्रशासनिक दक्षता के लिए दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का विलय कर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। आज यह क्षेत्र औद्योगिक विकास और प्रशासनिक सुधारों के संदर्भ में चर्चा में रहता है।

सरकारी नीतियां और कानूनी प्रावधान

10वें संविधान संशोधन अधिनियम 1961 द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर दादरा और नगर हवेली को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शामिल किया गया। अनुच्छेद 1 भारत के क्षेत्र को परिभाषित करता है। अनुच्छेद 2 नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना से संबंधित है। अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित करता है। केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से किया जाता है।

चुनौतियां और मुद्दे

पहला, प्रशासनिक समेकन की चुनौती।
दूसरा, आर्थिक और अवसंरचनात्मक विकास की आवश्यकता।
तीसरा, स्थानीय प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी।
चौथा, वित्तीय निर्भरता और संसाधनों का प्रबंधन।
पांचवां, स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक संरक्षण।

आगे की राह

सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करते हुए केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाना चाहिए।
सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर बल दिया जाना चाहिए।
स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त बनाना आवश्यक है।
प्रशासनिक संरचना की समय समय पर समीक्षा की जानी चाहिए।

परीक्षा के लिए महत्व

प्रारंभिक परीक्षा के लिए

1 वर्ष 1961
2 दादरा और नगर हवेली का भारतीय संघ में समावेशन
3 प्रथम अनुसूची में संशोधन
4 अनुच्छेद 1 और 368 से संबंधित
5 1954 में पुर्तगाली शासन से मुक्ति
6 अनुच्छेद 239 के अंतर्गत प्रशासन
7 2020 में दमन और दीव के साथ विलय

मुख्य परीक्षा के लिए

1 नए क्षेत्रों के एकीकरण की संवैधानिक प्रक्रिया।
2 केंद्र शासित प्रदेशों की संघीय संरचना में भूमिका।
3 प्रशासनिक समेकन की चुनौतियां।
4 उपनिवेशवाद से मुक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण का विश्लेषण।

साक्षात्कार के लिए

1 राष्ट्रीय एकीकरण संविधान के माध्यम से सुनिश्चित किया गया।
2 केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनिक लचीलेपन का उदाहरण हैं।
3 विकास और स्थानीय सहभागिता साथ साथ चलनी चाहिए।
4 संघीय ढांचे में संतुलन आवश्यक है।

संक्षेप में

10वां संविधान संशोधन अधिनियम 1961 ने दादरा और नगर हवेली को औपचारिक रूप से भारतीय संघ में सम्मिलित किया। इसने प्रथम अनुसूची में संशोधन कर इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया। यह संशोधन भारत के राष्ट्रीय एकीकरण और संघीय ढांचे की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।