निवारक निरोध का अर्थ है किसी व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए अपराध के लिए नहीं बल्कि भविष्य में संभावित रूप से कानून व्यवस्था भंग करने की आशंका के आधार पर हिरासत में लेना। इसका उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि समाज की शांति सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना होता है।
सामान्य आपराधिक कानून में व्यक्ति को तभी गिरफ्तार किया जाता है जब उसने कोई अपराध किया हो या अपराध करने का ठोस प्रमाण हो। इसके विपरीत निवारक निरोध में व्यक्ति को इस आशंका के आधार पर हिरासत में लिया जाता है कि वह भविष्य में ऐसा कार्य कर सकता है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा सार्वजनिक व्यवस्था या राज्य की शांति को खतरा हो सकता है।
भारतीय संविधान में निवारक निरोध का प्रावधान अनुच्छेद 22 में किया गया है। अनुच्छेद 22 के अनुसार सामान्य गिरफ्तारी की स्थिति में व्यक्ति को कई अधिकार प्राप्त होते हैं जैसे गिरफ्तारी के कारण की जानकारी वकील से परामर्श और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किया जाना। लेकिन निवारक निरोध के मामलों में इन अधिकारों पर कुछ सीमाएं लगाई जा सकती हैं।
हालांकि संविधान निवारक निरोध की अनुमति देता है फिर भी इसके साथ कुछ सुरक्षा उपाय भी निर्धारित करता है। किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के तहत तीन महीने से अधिक समय तक तभी रखा जा सकता है जब एक सलाहकार बोर्ड इसकी पुष्टि करे। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को निरोध के कारणों की जानकारी देना आवश्यक होता है ताकि वह अपना पक्ष रख सके।
निवारक निरोध का प्रयोग मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा विदेशी संबंध सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने जैसे मामलों में किया जाता है। स्वतंत्र भारत में निवारक निरोध अधिनियम 1950 जैसे कानून बनाए गए और समय समय पर विभिन्न राज्यों ने अपने स्तर पर भी ऐसे कानून लागू किए।
हाल के वर्षों में निवारक निरोध को लेकर यह बहस होती रही है कि इसका दुरुपयोग नागरिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया है कि निवारक निरोध एक अपवादात्मक व्यवस्था है और इसका प्रयोग बहुत सावधानी और आवश्यकता की स्थिति में ही किया जाना चाहिए।
संक्षेप में निवारक निरोध एक ऐसी कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत संभावित खतरे को रोकने के लिए किसी व्यक्ति को पहले ही हिरासत में लिया जा सकता है लेकिन इसे संविधान द्वारा निर्धारित सीमाओं और सुरक्षा उपायों के भीतर ही लागू किया जाना चाहिए।
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