1 परिचय

13वां संविधान संशोधन अधिनियम 1962 ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 और 71 में संशोधन किया। इसका मुख्य उद्देश्य उपराष्ट्रपति के निर्वाचन तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवादों में प्रक्रियात्मक अस्पष्टताओं को दूर करना था। इस संशोधन ने यह स्पष्ट किया कि निर्वाचन मंडल में रिक्तियां होने के कारण चुनाव अमान्य नहीं होगा। इस प्रकार इसने संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ किया, संवैधानिक पदों की निरंतरता सुनिश्चित की और संस्थागत स्थिरता को मजबूत किया। यह भारत के संवैधानिक विकास में प्रक्रियात्मक स्पष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।

2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक संदर्भ

मूल संविधान में अनुच्छेद 66 उपराष्ट्रपति के निर्वाचन की व्यवस्था करता था, जबकि अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय को सौंपता था। किंतु यह स्पष्ट नहीं था कि यदि निर्वाचन मंडल में रिक्तियां हों तो क्या चुनाव की वैधता प्रभावित होगी। यह स्थिति संभावित संवैधानिक अनिश्चितता उत्पन्न कर सकती थी। प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से यह आवश्यक था कि उच्चतम संवैधानिक पदों के कार्य में बाधा न आए। इसी उद्देश्य से अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया गया।

3 संवैधानिक प्रावधान और विधिक परिवर्तन

इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 66 में यह स्पष्ट किया गया कि निर्वाचन मंडल में रिक्तियों के आधार पर उपराष्ट्रपति के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती। अनुच्छेद 71 में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया कि ऐसे विवादों का अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करेगा और केवल रिक्तियों के कारण चुनाव अमान्य नहीं होगा। अनुच्छेद 54 और 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित हैं जबकि अनुच्छेद 66 उपराष्ट्रपति से संबंधित है। संशोधन के बाद की स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और स्थिर हो गई।

4 समकालीन प्रासंगिकता

हाल के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में भी निर्वाचन मंडल की संरचना और रिक्तियों से जुड़े प्रश्न उठते रहे हैं। यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि ऐसी परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया बाधित न हो और संवैधानिक संकट उत्पन्न न हो। इससे लोकतांत्रिक स्थिरता और संस्थागत निरंतरता बनी रहती है।

5 यूपीएससी परिप्रेक्ष्य से विश्लेषण

प्रक्रियात्मक संवैधानिक संशोधन प्रभावी शासन के लिए आवश्यक हैं। यह संशोधन संवैधानिक नैतिकता को सुदृढ़ करता है और अनुच्छेद 71 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को स्पष्ट करता है। यह शक्तियों के पृथक्करण और संसदीय लोकतंत्र की निरंतरता को मजबूत करता है। साथ ही यह निर्वाचन प्रक्रिया में स्पष्टता के माध्यम से संघीय ढांचे को स्थिरता प्रदान करता है।

6 चुनौतियां और मुद्दे

संवैधानिक प्रमुखों के अप्रत्यक्ष निर्वाचन पर बहस
अपूर्ण निर्वाचन मंडल से संबंधित चिंताएं
निर्वाचन मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं
संवैधानिक पदों की राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना
संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति सीमित जन जागरूकता

7 आगे की दिशा

अप्रत्यक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना
विधायिकाओं में रिक्त पदों को समय पर भरना
संवैधानिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना
निर्वाचन विवादों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना
संस्थागत जवाबदेही को सुदृढ़ करना

8 परीक्षा के लिए महत्व

प्रारंभिक परीक्षा हेतु

वर्ष 1962, अनुच्छेद 66 और 71 में संशोधन
उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित
रिक्तियों के बावजूद चुनाव वैध
अनुच्छेद 71 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को अधिकार
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत पारित
अनुच्छेद 54 और 55 से वैचारिक संबंध

मुख्य परीक्षा हेतु

संवैधानिक लोकतंत्र में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का विश्लेषण
अनुच्छेद 71 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका
भारत में अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली पर चर्चा
संवैधानिक नैतिकता और संस्थागत स्थिरता से संबंध
राष्ट्रपति के निर्वाचन और निर्वाचन मंडल से संबंधित प्रश्नों से समानता

साक्षात्कार हेतु

लोकतंत्र में प्रक्रियात्मक स्पष्टता का महत्व
वैधता और निरंतरता के बीच संतुलन
संवैधानिक अखंडता की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका

9 पिछले वर्षों के प्रश्नों की प्रवृत्ति

प्रारंभिक परीक्षा में संशोधन संख्या, वर्ष और संबंधित अनुच्छेदों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा में संघवाद, संसदीय लोकतंत्र और संस्थागत स्थिरता से संबंधित विश्लेषण अपेक्षित होता है। राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं में अनुच्छेद संख्या और संशोधन वर्ष पर विशेष ध्यान दिया जाता है। सामान्य त्रुटि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के प्रावधानों को भ्रमित करना है।

10 संक्षेप में

इस संशोधन ने उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रक्रियात्मक स्पष्टता प्रदान की।
रिक्तियों के बावजूद चुनाव की वैधता सुनिश्चित की।
संवैधानिक संस्थाओं की निरंतरता को सुदृढ़ किया।