मेनका मामला 1978 और भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विस्तार
मेनका मामला 1978 जिसे मेनका गांधी बनाम भारत संघ के नाम से जाना जाता है भारतीय संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इस निर्णय ने व्यक्तिगत स्वतंत...
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मेनका मामला 1978 जिसे मेनका गांधी बनाम भारत संघ के नाम से जाना जाता है भारतीय संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इस निर्णय ने व्यक्तिगत स्वतंत...
गोपालन मामला 1950 जिसे ए के गोपालन बनाम मद्रास राज्य के नाम से जाना जाता है भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णयित प्रारंभिक संवैधानिक मामलों में स...
1994 का एस. आर. बोम्मई मामला भारतीय संघीय लोकतंत्र की रक्षा का प्रतीक है। इसने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को सीमित किया और राष्ट्रपति शासन के निर्णयों क...
1973 का केशवानंद भारती निर्णय भारतीय संविधान में "मूल संरचना सिद्धांत" की स्थापना का आधार बना। इसने संसद की संशोधन शक्ति को सीमित किया और यह सुनिश्चित...
1967 का गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य मामला इस बात की पुष्टि करता है कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती। इस निर्णय ने न्यायिक समीक्षा की प्रधान...
भारत का संविधान 1950 में लागू होने के बाद सरकार ने पहला संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 लाया। इसका उद्देश्य संपत्ति के अधिकार पर कुछ सीमाएँ लगाना और भूमि...