प्रस्तावना
भारतीय इतिहास
में कुछ ही महिलाएँ ऐसी रही हैं जिन्होंने शासन, समाज सुधार और संस्कृति के
क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। अहिल्याबाई होल्कर (1725–1795)
मराठा
साम्राज्य की ऐसी ही महान शासिका थीं। उन्हें आज भी उनके न्यायप्रिय
शासन, प्रशासनिक
दक्षता, तथा धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यों के लिए स्मरण
किया जाता है। UPSC Mains और State PSC Mains परीक्षाओं में उनसे जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे
जाते हैं, विशेषकर महिला नेतृत्व,
सुशासन और
सामाजिक सुधार से संबंधित।
जीवन परिचय
- जन्म: 31 मई 1725, ग्राम चौंडी (महाराष्ट्र)
- विवाह: मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव होल्कर से
- प्रशासन
की बागडोर: 1754 में पति की मृत्यु और 1766 में ससुर मल्हारराव की
मृत्यु के बाद उन्होंने इंदौर राज्य का संचालन संभाला।
- मृत्यु:
13 अगस्त 1795, इंदौर।
प्रशासनिक योगदान
- सुशासन का
आदर्श: प्रजा को परिवार की तरह माना और “मातृवत
शासिका” की छवि बनाई।
- भ्रष्टाचार
नियंत्रण: कठोरता से भ्रष्टाचार रोका, प्रशासन
में पारदर्शिता सुनिश्चित की।
- आर्थिक
नीति:
- कर
व्यवस्था सरल व न्यायपूर्ण।
- किसानों
के हित में नीतियाँ और कृषि संवर्द्धन।
- व्यापार
और वाणिज्य को बढ़ावा।
- न्यायप्रियता: वे “न्याय की प्रतिमूर्ति” कही जाती थीं। विवाद निपटान
में त्वरित व निष्पक्ष निर्णय देती थीं।
सामाजिक और धार्मिक योगदान
- धार्मिक
सहिष्णुता: सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टि।
- तीर्थ
पुनर्निर्माण: काशी, गया,
सोमनाथ, उज्जैन, द्वारका, हरिद्वार
सहित अनेक तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार।
- विशेष
रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर (1777) का
पुनर्निर्माण उनका सबसे प्रसिद्ध
कार्य है।
- संस्कृति
संरक्षण: मंदिर, धर्मशालाएँ, कुएँ और
तालाब बनवाए।
महिला सशक्तिकरण का प्रतीक
- 18वीं
शताब्दी में जब महिलाओं की राजनीतिक भूमिका लगभग नगण्य थी, अहिल्याबाई
ने साबित किया कि महिलाएँ भी श्रेष्ठ
शासक और आदर्श प्रशासक हो सकती हैं।
- उनके शासन
को स्त्री नेतृत्व का आदर्श माना जाता
है।
UPSC/PSC परीक्षा दृष्टिकोण
संभावित प्रश्न:
- अहिल्याबाई
होल्कर का शासन मराठा इतिहास में आदर्श क्यों माना जाता है?
- उनके
प्रशासनिक व धार्मिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
- भारतीय
इतिहास में महिला नेतृत्व की परंपरा में अहिल्याबाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर लेखन सुझाव:
- परिचय में
जीवन परिचय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
- मुख्य भाग
में प्रशासनिक, सामाजिक व धार्मिक योगदान।
- निष्कर्ष
में “मातृवत शासिका और आदर्श प्रशासक” की छवि।
निष्कर्ष
अहिल्याबाई
होल्कर केवल एक शासिका नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और
सुशासन का अद्वितीय उदाहरण थीं। उन्होंने दिखाया कि भारतीय महिलाएँ
न केवल प्रेरणा-स्त्रोत रही हैं, बल्कि प्रशासनिक आदर्श भी रही हैं। UPSC/PSC
परीक्षाओं के
लिए उनका अध्ययन महिला नेतृत्व, सुशासन और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ
प्रदान करता है।
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