परिचय

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक, जो 2025 में दावोस, स्विट्ज़रलैंड में "सहयोग की बुद्धिमान आयु" थीम पर आयोजित हुई, वैश्विक आर्थिक, तकनीकी व नीति संवाद का प्रमुख प्लेटफॉर्म है। भारत के लिए यह भागीदारी संविधान व विकास से जुड़े मुद्दों—समावेशी वृद्धि, रोजगार, जलवायु कार्रवाई व डिजिटल परिवर्तन—से जुड़ी है (अनुच्छेद 19: व्यापार, अनुच्छेद 21: जीवन व सम्मान का अधिकार, अनुच्छेद 39: सामाजिक न्याय व आजीविका)।


पृष्ठभूमि व संदर्भ

दावोस शिखर सम्मेलन परंपरागत रूप से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति व शासन का रुख तय करता है, जहां आर्थिक वैश्वीकरण, व्यापार सुधार और सतत विकास पर चर्चा होती है। भारत की WEF सहभागिता हाल के दशकों में बढ़ी है, जिसमें जलवायु नेतृत्व, डिजिटल परिवर्तन व वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में नेतृत्व पर जो़र रहा। G20 नेतृत्व और ब्रिक्स विस्तार ने भारत की भूमिका को और सशक्त किया है।


वर्तमान स्थिति

2025 की बैठक में भारत के लिए पाँच प्रमुख थीम रहीं:

  1. आर्थिक वृद्धि बनाए रखना: IMF द्वारा भारत की 6.5% वृद्धि का अनुमान, आपूर्ति शृंखला व टैरिफ में सुधार की संभावनाएँ।

  2. तकनीकी व नवाचार: AI, फिनटेक, हेल्थटेक व सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियाँ।

  3. मानव संसाधन में निवेश: कौशल, डिजिटल समावेशन व कार्यबल आधुनिकीकरण पर फोकस, खासकर महिलाओं व युवाओं के लिए।

  4. जलवायु संरक्षण: इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्रीन फाइनेंस व रिन्यूएबल इनवेस्टमेंट में भारत का नेतृत्व।

  5. वैश्विक भरोसा निर्माण: भागीदारीपूर्ण नीति निर्माण व वैश्विक साझेदारी, EU-India रणनीतिक संबंध शामिल।

प्रमुख राज्यों—आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु—ने AI, ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन एनर्जी और औद्योगिक सुधार के स्थानीय एजेंडा प्रस्तुत किए।


सरकारी नीतियाँ व कानूनी पहल

  • वार्ता में राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन, स्किल इंडिया, आपूर्ति शृंखला सुधार महत्वपूर्ण।

  • जलवायु व पर्यावरण पर पेरिस समझौता व इंटरनेशनल सोलर अलायंस का उल्लेख।

  • डिजिटल इंडिया व डेटा सुरक्षा (व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक का मसौदा, 2023) शामिल।

  • निवेश वार्ता में आत्मनिर्भर भारत व अन्य सुधारों पर जोर।

चुनौतियाँ / मुद्दे

  1. वैश्विक मंदी: व्यापार विवाद व महामारी के बाद धीमी आर्थिक रिकवरी।

  2. रोजगार सृजन: आर्थिक वृद्धि व गुणवत्तापूर्ण रोजगार में अंतर।

  3. तकनीकी अपनाने में अंतर: क्षेत्रीय व सामाजिक विविधता।

  4. जलवायु व सतत विकास: धन व नीति कार्यान्वयन का अभाव।

  5. आपूर्ति शृंखला की स्थिरता: भू-राजनीतिक चुनौती व संरक्षणवाद।

  6. वैश्विक भरोसा व सहयोग: नई सहमति निर्माण की आवश्यकता।

आगे की राह

  1. वैश्विक आर्थिक एकीकरण गहरा करें: टैरिफ घटाएँ, इनोवेशन व आपूर्ति शृंखला विस्तार।

  2. स्किल व शिक्षा में निवेश: महिलाओं व हाशिए के समूहों को भी समावेशी अवसर।

  3. सतत वित्तीय इनोवेशन: ग्रीन बॉंड व क्लाइमेट फाइनेंस मार्केट का विस्तार।

  4. साझेदार शासन: डिजिटल ट्रस्ट व राज्यों की सहभागिता को बढ़ावा।

  5. सामाजिक समावेशन हेतु तकनीक का विस्तार: स्वास्थ्य, शिक्षा व ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल टूल्स का उपयोग।

परीक्षा के लिए महत्व

प्रारंभिक परीक्षा:

  • WEF Davos 2025 थीम: "Collaboration for the Intelligent Age"

  • IMF भारत वृद्धि अनुमान: 6.5% (2025)

  • इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्रीन फाइनेंस

  • मुख्य राज्य: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश

  • पेरिस समझौता

  • आत्मनिर्भर भारत सुधार

  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023 (मसौदा)

  • राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन, डिजिटल इंडिया

मुख्य परीक्षा:

  • वैश्विक मंदी का भारत की वृद्धि पर प्रभाव।

  • केस स्टडी: भारत की आपूर्ति शृंखला नीति।

  • विश्लेषण: महिलाओं की भागीदारी व डिजिटल समावेशन।

  • नीति बहस: सतत अवसंरचना व जलवायु वित्त की चुनौतियाँ।

  • उदाहरण: इंटरनेशनल सोलर अलायंस व EU-India रणनीतिक साझेदारी।

साक्षात्कार:

  • दावोस में भारत की सक्रियता वैश्विक नेतृत्व व नीति प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

  • डिजिटल नवाचार व रिन्यूएबल इन्वेस्टमेंट भारत की वृद्धि के प्रमुख स्तंभ हैं।

  • वैश्विक साझेदारी व नीति तालमेल रोजगार व जलवायु चुनौतियों के समाधान में सहायक।

संक्षेप में

दावोस 2025 में भारत की भूमिका वृद्धि, नवाचार व सतत विकास की दिशा में रही। वैश्विक निष्कर्षों का देश के लिए लाभ तभी संभव है जब सुधार, समान अवसर व भागीदारी पर ध्यान हो।