परिचय

भारत में युवा रोजगार, संविधान के अनुच्छेद 41 (कार्य का अधिकार), अनुच्छेद 39 (समान अवसर) और अनुच्छेद 21 (सम्मानजनक जीवन का अधिकार) के तहत सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास की सोच से जुड़ा है। कोविड-19 महामारी ने पहले से मौजूद रोजगार चुनौतियों को और बढ़ा दिया, जिससे राज्य और युवाओं के बीच नए सामाजिक समझौते की आवश्यकता महसूस हुई जो समावेशी विकास, स्थिरता और अवसर सुनिश्चित करे।


पृष्ठभूमि और संदर्भ

इतिहास में, भारत की युवा जनसंख्या को लाभ मानकर देखा गया है, लेकिन बेरोजगारी और अधूरी रोजगार समस्या ने इसे कम प्रभावी बनाया है। शिक्षा, कौशल विकास और नौकरी सृजन के बीच संबंध बनाना आज भी चुनौती है। महामारी के बाद की रिकवरी में कौशल विकास, उद्यमशीलता को प्रोत्साहन और डिजिटल रोजगार को बढ़ावा देना प्रमुख रणनीति बन गई है। स्किल इंडिया मिशन (2015) और स्टार्टअप इंडिया (2016) जैसी योजनाएं इस ऊर्जा का सदुपयोग करने के लिए शुरू हुईं।


वर्तमान स्थिति

2025 तक, युवा बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर युवा बेरोजगारी दर लगभग 13.8% है, जबकि शहरी युवाओं में यह लगभग 17.2% से भी अधिक है। लिंग और ग्रामीण-शहरी भेद स्पष्ट हैं; शहरी महिला युवा बेरोजगारी लगभग 23.7% है। स्टार्टअप, डिजिटल क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन 7 में से 1 युवा को नौकरी नहीं मिल पाती। सरकार ने विशाल कौशल विकास कार्यक्रम, उद्यमशीलता समर्थन और डिजिटल अवसंरचना के जरिए इन असमानताओं को कम करने का प्रयास किया है।


सरकारी नीतियां और कानूनी प्रावधान

  • कौशल भारत मिशन (2015) जो बाजार उपयुक्त कौशल में प्रशिक्षण प्रदान करता है।

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)।

  • स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव।

  • श्रम कानून सुधार।

  • राष्ट्रीय रोजगार सेवा पोर्टल।

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA)।

  • संविधान के अनुच्छेद 41, 39, और 21।

चुनौतियाँ

  1. कौशल असंगति: शिक्षा और बाजार की आवश्यकताएं मेल नहीं खातीं।

  2. लैंगिक असमानता: शहरी महिला युवा बेरोजगारी अधिक।

  3. अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार: ज्यादातर रोजगार असुरक्षित हैं।

  4. डिजिटल विभाजन: ग्रामीण युवाओं के लिए सीमित डिजिटल पहुँच।

  5. कोविड-19 का प्रभाव: खासकर खुदरा, आतिथ्य और निर्माण क्षेत्रों पर आर्थिक झटका।

  6. नीतिगत कार्यान्वयन की बाधाएं।

आगे की राह

  1. कौशल विकास को अपडेट करें, आईटी, हरित रोजगार आदि पर ध्यान।

  2. महिलाओं के रोजगार को प्रोत्साहित करें।

  3. अनौपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा बढ़ाएं।

  4. डिजिटल पहुँच और साक्षरता बढ़ाएं।

  5. युवा स्वरोजगार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दें।

  6. सरकारी योजनाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें।

सारांश

महामारी के बाद भारत में युवा रोजगार एक निर्णायक मोड़ पर है। समग्र नीतियाँ कौशल, उद्यमशीलता और सामाजिक समावेशन के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाएं ताकि युवाजनसंख्या विकास का स्रोत बन सके।