प्रस्तावना
भारत में राज्यों की वित्तीय स्थिति सिर्फ़ बजट और राजस्व-व्यय का मामला नहीं है। यह राज्य सरकारों की सुशासन क्षमता, उनके विकास कार्यक्रमों की स्थिरता, और आर्थिक एवं सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में “राज्यों की वित्तीय स्थिति” (fiscal health) UPSC और PSC दोनों में उठने वाले विषयों में शामिल है — चाहे वो अर्थनीति विषय हो, संघ-राज्य सम्बन्ध हो, या लोक नीति व सार्वजनिक वित्त।
मुख्य बिंदु
-
राजस्व स्रोत (Own Revenue) और निर्भरता
-
राज्य अपने टैक्स राजस्व (टैक्स और गैर-टैक्स) के माध्यम से कितनी कमाई कर पा रहे हैं?
-
किस राज्य की टैक्स घोषणाएँ, राज्य GST, वैत्यक्त आर्थिक गतिविधियाँ आदि कौन-से राज्यों को अधिक राजस्व दे पाती हैं।
-
केंद्र से मिलने वाली अनुदान (grants), मध्यस्थ आर्थिक सहायता और उनकी निर्भरता।
-
-
खर्च की संरचना (Expenditure Pattern)
-
विकासात्मक खर्च (like शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा) बनाम पुनरावृत्ति खर्च (संचालन, वेतन, पेंशन आदि)।
-
राज्य की ऋण-सेवा (debt servicing) कितनी बढ़ रही है? ब्याज और मूलधन की वापसी कितनी वित्तीय अस्थिरता पैदा कर रही है।
-
-
राजस्व घाटा और बजट घाटा
-
क्या राज्य अपने बजट को संतुलित रख पा रहे हैं? यदि नहीं, तो घाटा कितना है और कैसे वित्त पोषण हो रहा है (उधार, केंद्र से सहायता)?
-
बजट घाटा तथा राजस्व घाटा की अवधारणाएँ और उनके प्रभाव।
-
-
ऋण स्थिति (Debt Levels) और ऋण टिकाऊपन (Debt Sustainability)
-
राज्य सरकारों के कुल ऋण / प्रति-मुख्य (per capita) ऋण का स्तर।
-
ऋण भुगतान दबाव (interest burden) क्या आर्थिक विकास को प्रभावित कर रहा है?
-
दीर्घ-कालीन वित्तीय योजना और देयता नियंत्रण।
-
-
निरक्षण एवं सुधार उपाय
-
बजट प्रबंधन कानून (Fiscal Responsibility & Budget Management Acts) और राज्यों में उनकी भूमिका।
-
राजस्व बढ़ाने के उपाय: कर आधार बढ़ाना, कर चोरी एवं कम संग्रहण को कम करना।
-
खर्च की प्राथमिकता तय करना, बेकार व्यय कम करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की संभावनाएं।
-
-
मामले अध्याय: COVID-19 के बाद स्थिति
-
महामारी ने राज्यों की वित्तीय स्थिति को कैसे प्रभावित किया? राजस्व में कमी, स्वास्थ्य एवं राहत खर्च में वृद्धि।
-
रिकवरी के उपाय: केंद्र से सहायता, पूंजीगत व्यय बढ़ाना आदि।
-
UPSC / PSC परीक्षा दृष्टिकोण
संभावित प्रश्न:
-
“भारत में राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए किन-किन नीतिगत कदमों की ज़रूरत है?”
-
“राज्यों की बढ़ती ऋण-भार स्थितियों के लाभ एवं हानि पर चर्चा कीजिए।”
-
“राजस्व घाटा तथा बजट घाटा — उनके बीच क्या अंतर है और उन्हें नियंत्रित करने के उपाय क्या हो सकते हैं?”
उत्तर लेखन सुझाव:
-
परिचय में ‘Fiscal Health’ की परिभाषा दें।
-
मुख्य भाग में ऊपर दिए गए बिंदुओं से विश्लेषण करें: राजस्व, व्यय, ऋण, बजट घाटा आदि।
-
उदाहरण दें (राज्य-विशेष उदाहरण जैसे केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि) — कौन-से राज्य बेहतर प्रबंधन कर रहे हैं, कौन पीछे हैं।
-
सुधार के उपाय स्पष्ट करें, और केंद्र-राज्य साझेदारी की भूमिका बताएं।
-
निष्कर्ष में समेकित दृष्टिकोण से यह बताएं कि कैसे राज्यों की वित्तीय स्थिति केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक विकास और सुशासन के लिए भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
राज्यों की वित्तीय स्थिति सुधारना सिर्फ अर्थव्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि जनता की भलाई, राज्य-स्तरीय सेवाओं की गुणवत्ता, तथा दीर्घ-कालीन विकास की आधारशिला है। UPSC और PSC के लिए यह विषय इसलिए विशेष है क्योंकि यह नीति निर्धारण, संघ-राज्य संबंध, बजट प्रबंधन और सार्वजनिक वित्त जैसे गहरे और व्यापक विषयों को जोड़ता है। यदि आप इस विषय की गहराई से तैयारी करेंगे — डेटा, राज्य-निर्देशित रिपोर्ट्स, सुधार नीतियाँ — तो यह निश्चित रूप से आपको परीक्षा में बेहतर अंक दिलाएगा।
Comments (0)
Leave a Comment