भारत में लघु उद्योग क्षेत्र: प्रमुख समितियाँ, संस्थाएँ और महत्व
भारत में लघु उद्योग क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। इनमें कर्वे समिति (1955) ने ग्रामीण एवं लघु उद्योगों पर बल दिया और आबिद हुसैन समिति (1991) ने लघु उद्योगों के लिए आरक्षित वस्तु सूची को समाप्त/घटाने की सिफारिश की। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सहायता व प्रोत्साहन देने वाली एक महत्त्वपूर्ण संस्था है।
प्रमुख समितियाँ
I. नायक समिति
- गठन/प्रसंग: 1991 (आरबीआई के परिप्रेक्ष्य में)
- उद्देश्य: लघु उद्योगों के लिए बैंक ऋण/कार्यशील पूंजी की पर्याप्तता पर सिफारिशें देना।
- मुख्य सिफारिशें:
- टर्नओवर-आधारित कार्यशील पूंजी आकलन को बढ़ावा देना।
- लघु इकाइयों के ऋण प्रवाह में प्रक्रियात्मक बाधाएँ कम करना।
- बैंक-एमएसएमई समन्वय तंत्र को मज़बूत करना।
II. आबिद हुसैन समिति
- गठन: 1991
- उद्देश्य: छोटे/लघु उद्योगों के विकास की संभावनाएँ एवं नीतिगत सुधार सुझाना।
- मुख्य सिफारिशें:
- लघु उद्योगों के लिए आरक्षित वस्तु सूची का चरणबद्ध समाप्तिकरण/कमी।
- प्रतिस्पर्धा, आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहन।
- वित्त, विपणन और तकनीकी सहायता तक सुगम पहुँच सुनिश्चित करना।
III. एस. एस. कोहली समिति
- गठन: 1999 (भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा)
- उद्देश्य: बैंकिंग क्षेत्र में प्रौद्योगिकी उन्नयन (Technology Upgradation)
- मुख्य सिफारिशें:
- कोर बैंकिंग समाधान (CBS) को अपनाना और विस्तार देना।
- डिजिटल भुगतान, आईटी नेटवर्क और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना।
- सेवा गुणवत्ता और परिचालन दक्षता बढ़ाने हेतु आईटी-समर्थ सुधार।
IV. कर्वे समिति
- गठन: 1955
- उद्देश्य: ग्रामीण एवं लघु उद्योगों का अध्ययन और संवर्धन।
- मुख्य सिफारिशें:
- ग्रामीण कुटीर/लघु उद्योगों को संस्थागत सहायता और प्रशिक्षण।
- सहकारी ढाँचे और विपणन सहायता को मज़बूत करना।
- रोज़गारोन्मुख छोटे उद्यमों के लिए नीति-समर्थ वातावरण बनाना।
तुलना (सारणी)
| समिति | वर्ष/गठन | मुख्य फोकस | संक्षिप्त सिफारिशें |
|---|---|---|---|
| नायक समिति | 1991 | एमएसएमई/लघु उद्योगों हेतु बैंक ऋण | टर्नओवर-आधारित कार्यशील पूंजी, ऋण प्रक्रियाएँ सरल, बैंक-एमएसएमई समन्वय |
| आबिद हुसैन समिति | 1991 | लघु उद्योग नीति सुधार | आरक्षित सूची में कमी/समाप्ति, प्रतिस्पर्धा व आधुनिकीकरण, सहायता तक पहुँच |
| एस. एस. कोहली समिति | 1999 | बैंकिंग-टेक्नोलॉजी उन्नयन | CBS अपनाना, डिजिटल भुगतान/आईटी नेटवर्क विस्तार, सेवा गुणवत्ता सुधार |
| कर्वे समिति | 1955 | ग्रामीण एवं लघु उद्योग | संस्थागत/प्रशिक्षण सहायता, सहकारिता व विपणन मज़बूत, रोजगारोन्मुख नीतियाँ |
अन्य संबंधित संस्थाएँ
- राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC): भारत सरकार का उद्यम, जो एमएसएमई को विपणन सहायता, क्रेडिट सुविधा, तकनीकी सेवाएँ और इन्क्यूबेशन का समर्थन देता है।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME): एमएसएमई के समग्र विकास हेतु नीतियाँ बनाना और लागू करना।
- राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD): उद्यमिता प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श सेवाएँ प्रदान करना।
लघु उद्योगों का महत्व
- रोज़गार सृजन: ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोज़गार अवसर।
- विकेन्द्रीकृत विकास: महानगरों से परे औद्योगिक विकास और संतुलित क्षेत्रीय प्रगति।
- उद्यमिता संवर्धन: अपेक्षाकृत कम पूंजी में नए उद्यमों के लिए सहायक मंच।
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