पृष्ठभूमि
स्वतंत्रता के बाद भारत को चार भागों में विभाजित किया गया था जिन्हें भाग क भाग ख भाग ग और भाग घ राज्य कहा गया। यह विभाजन ऐतिहासिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित था विशेषकर रियासतों और प्रांतों के विलय के कारण। यह व्यवस्था जटिल और असमान थी जिससे प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही थीं।
इस स्थिति को सुधारने के लिए 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया गया जिसके अध्यक्ष फजल अली थे और सदस्य के एम पनिक्कर तथा एच एन कुंजुरु थे। आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन की सिफारिश मुख्य रूप से भाषाई आधार पर की।
इन सिफारिशों को लागू करने के लिए 1956 में संविधान का सातवां संशोधन अधिनियम पारित किया गया। इसने भारत के प्रशासनिक ढांचे में बड़े परिवर्तन किए और पुराने राज्य वर्गीकरण को समाप्त कर दिया।
प्रीलिम्स परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
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अधिनियम पारित होने का वर्ष 1956
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राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद
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प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू
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आधारित राज्य पुनर्गठन आयोग 1953 की सिफारिशों पर
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परिणामस्वरूप 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बने
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भाग क ख ग और घ राज्यों का वर्गीकरण समाप्त किया गया
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संघ सूची और अनुसूचियों में संशोधन किया गया
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संविधान की पहली चौथी और सातवीं अनुसूचियों में बदलाव किया गया
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अनुच्छेद 1 से 4 में संशोधन किया गया
मुख्य प्रावधान और प्रमुख तथ्य
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राज्यों का पुनर्गठन
राज्यों की सीमाओं और संरचना को भाषाई और प्रशासनिक सुविधा के आधार पर पुनर्गठित किया गया। -
पुराने वर्गीकरण का अंत
पहले राज्यों को चार भागों में बांटा गया था भाग क भाग ख भाग ग और भाग घ। सातवें संशोधन ने इन सभी वर्गों को समाप्त कर समान संवैधानिक दर्जा दिया। -
अनुच्छेद 1 में परिवर्तन
भारत को राज्यों का संघ के रूप में परिभाषित किया गया जिसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। -
पहली अनुसूची में संशोधन
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम सीमाओं और क्षेत्रों में संशोधन किया गया। -
सातवीं अनुसूची में परिवर्तन
केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण में आवश्यक बदलाव किए गए ताकि नया प्रशासनिक ढांचा संगत रहे। -
उच्च न्यायालयों की स्थापना
संशोधन ने दो या अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए साझा उच्च न्यायालय स्थापित करने की अनुमति दी। -
केंद्र शासित प्रदेशों का प्रबंधन
केंद्र शासित प्रदेशों के शासन के लिए समान प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई जो सीधे राष्ट्रपति के नियंत्रण में रही। -
अखिल भारतीय सेवाएं
संशोधन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा जैसी संयुक्त सेवाओं की स्थापना को संवैधानिक मान्यता दी।
महत्व
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देशभर में एक समान प्रशासनिक ढांचा स्थापित हुआ।
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भाषाई और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा मिला।
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भारतीय संघवाद को सुदृढ़ किया गया।
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राज्यों के बीच समानता सुनिश्चित हुई।
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शासन और नीति क्रियान्वयन में सुगमता आई।
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भविष्य के प्रशासनिक सुधारों के लिए नींव तैयार हुई।
सीमाएं या आलोचना
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कुछ क्षेत्रों में असंतोष बना रहा जैसे बंबई और पंजाब।
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भाषाई आधार पर पुनर्गठन ने कुछ स्थानों पर क्षेत्रीयता को बढ़ावा दिया।
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कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हुईं।
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आर्थिक कारकों की अपेक्षा भाषाई आधार को अधिक महत्व दिया गया।
परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु
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संशोधन वर्ष 1956
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प्रकार संरचनात्मक और संघीय पुनर्गठन
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आयोग राज्य पुनर्गठन आयोग 1953
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राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद
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प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू
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प्रभावित अनुच्छेद 1 से 4 और 131 से 136
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संशोधित अनुसूचियां पहली चौथी और सातवीं
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गठित राज्य 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश
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आधार भाषाई पुनर्गठन
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संबंधित समितियां जेवीपी समिति 1948 और फजल अली आयोग 1953
संक्षेप में
सातवां संविधान संशोधन अधिनियम 1956 भारत में राज्यों के भाषाई आधार पर पुनर्गठन का ऐतिहासिक कदम था। इसने पुरानी राज्य प्रणाली को समाप्त कर 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों की नई संरचना दी। इस संशोधन ने भारत के संघीय ढांचे की नींव को मजबूत किया और प्रशासनिक एकता को नई दिशा दी।
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