परिचय
भारत कभी जनसंख्या विस्फोट के लिए जाना जाता था, लेकिन अब देश में प्रजनन दर में निरंतर गिरावट हो रही है। यह परिवर्तन भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। प्रजनन दर का अर्थ है कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चे जन्म देती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण एनएफएचएस 5 के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर वर्ष 2021 में 2.0 रही, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से कम है। इसका अर्थ है कि भारत की जनसंख्या स्थिर होने की दिशा में है। संविधान के नीति निदेशक तत्वों में जनस्वास्थ्य और परिवार कल्याण को सुधारने पर बल दिया गया है। इसलिए घटती प्रजनन दर का भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्वतंत्रता के समय भारत की प्रजनन दर लगभग 5.9 थी। तीव्र जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर चिंता थी। वर्ष 1952 में भारत ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया, जिससे वह ऐसा करने वाला विश्व का पहला देश बना। समय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, गर्भनिरोधक साधनों की पहुँच और जागरूकता में वृद्धि से प्रजनन दर में गिरावट आई।
साल 1990 के दशक में नीति का स्वरूप जनसंख्या नियंत्रण से बदलकर प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर केंद्रित हुआ। महिला सशक्तिकरण, शहरीकरण, बाल मृत्यु में कमी और बढ़ती आकांक्षाओं ने इस परिवर्तन को और तेज किया। इस प्रकार भारत की जनसांख्यिकीय यात्रा सामाजिक और आर्थिक रूपांतरण की प्रतीक है।

वर्तमान परिदृश्य
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019 से 2021 के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 है। यह 1992 से 93 में 3.4 और 2015 से 16 में 2.2 थी। अब अठारह राज्य और केंद्रशासित प्रदेश प्रतिस्थापन स्तर से नीचे हैं, जैसे केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और दिल्ली। जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और मेघालय जैसे राज्यों में यह अभी भी अधिक है।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग वर्ष 2064 में चरम पर पहुँचेगी और फिर धीरे धीरे घटेगी। वर्तमान में भारत की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जो 2050 तक 38 वर्ष हो सकती है। इससे कार्यबल में कमी और वृद्धजन संख्या में वृद्धि की संभावना है। घटती प्रजनन दर जहाँ संसाधनों पर दबाव घटाती है, वहीं भविष्य में श्रमबल की कमी और पेंशन भार बढ़ा सकती है।

सरकारी नीतियाँ और कानूनी प्रावधान

  1. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000, वर्ष 2045 तक जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य रखती है।

  2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017, प्रजनन, मातृ और बाल स्वास्थ्य पर ध्यान देती है।

  3. मिशन परिवार विकास 2016, उच्च प्रजनन दर वाले जिलों में परिवार नियोजन सेवाओं का विस्तार करता है।

  4. जननी सुरक्षा योजना और पोषण अभियान, मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए हैं।

  5. संविधान का अनुच्छेद 47, राज्य को जनस्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधारने का निर्देश देता है।

  6. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, सुरक्षित प्रसव हेतु वित्तीय प्रोत्साहन देती है।

मुख्य चुनौतियाँ

  1. क्षेत्रीय असमानता, कुछ राज्यों में बहुत कम तो कुछ में बहुत अधिक प्रजनन दर है।

  2. सामाजिक और लैंगिक कारक, पुत्र प्राथमिकता और प्रारंभिक विवाह जैसी परंपराएँ बनी हुई हैं।

  3. श्रमबल में गिरावट, तेज गिरावट से कार्यबल की कमी हो सकती है।

  4. वृद्धजन आबादी, वर्ष 2050 तक वृद्धजन की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है।

  5. स्वास्थ्य और शिक्षा में असमानता, कई महिलाएँ अभी भी प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं।

  6. आर्थिक प्रभाव, घटती कार्यशील जनसंख्या दीर्घकालिक विकास दर को प्रभावित कर सकती है।

आगे की दिशा

  1. मानव पूँजी पर निवेश बढ़ाया जाए ताकि कम जनसंख्या भी अधिक उत्पादक बन सके।

  2. महिलाओं की शिक्षा और रोजगार को बढ़ावा देकर विवाह और मातृत्व की औसत आयु बढ़ाई जाए।

  3. क्षेत्रीय नीतियाँ बनाई जाएँ, उच्च प्रजनन दर वाले राज्यों में नियंत्रण और निम्न दर वाले राज्यों में परिवार सहयोग पर ध्यान दिया जाए।

  4. वृद्धजन के लिए पेंशन और स्वास्थ्य बीमा प्रणाली मजबूत की जाए।

  5. समावेशी विकास और महिला श्रमबल भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।

  6. स्वैच्छिक परिवार नियोजन और जनजागरूकता को बढ़ाया जाए।

परीक्षा हेतु महत्त्व

प्रीलिम्स के लिए

  1. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019 से 2021 में भारत की प्रजनन दर 2.0 रही।

  2. प्रतिस्थापन स्तर 2.1 है।

  3. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 में प्रारंभ हुई।

  4. मिशन परिवार विकास 2016 में शुरू हुआ।

  5. अनुच्छेद 47 जनस्वास्थ्य से संबंधित है।

  6. भारत की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है।

मुख्य परीक्षा के लिए

  1. घटती प्रजनन दर का भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर प्रभाव का विश्लेषण करें।

  2. क्षेत्रीय असमानता और विकास पर इसके परिणाम समझाएँ।

  3. वृद्धजन आबादी और श्रमबल की कमी की चुनौतियाँ बताइए।

  4. कम जनसंख्या में उच्च उत्पादकता हेतु नीति उपाय सुझाएँ।

साक्षात्कार के लिए

  1. घटती प्रजनन दर भारत के विकास के लिए अवसर है या चुनौती।

  2. भारत वृद्ध समाज की ओर कैसे बढ़ रहा है।

  3. क्या सरकार को भविष्य में जन्म दर बढ़ाने की नीतियाँ अपनानी चाहिए।

संक्षेप में
भारत में घटती प्रजनन दर जनसांख्यिकीय परिपक्वता का संकेत है। इससे संसाधनों पर दबाव घटेगा, लेकिन कार्यबल की कमी और वृद्धजन भार नई चुनौतियाँ लाएँगे। आने वाले वर्षों में भारत का वास्तविक लाभांश उसकी मानव पूँजी की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।