पृष्ठभूमि
1918 का अहमदाबाद मज़दूर हड़ताल भारत के श्रमिक इतिहास की एक
महत्वपूर्ण घटना थी। यह आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ और यह पहली बार
था जब गांधीजी ने सत्याग्रह के सिद्धांत को औद्योगिक विवाद में लागू किया। यह
गुजरात के अहमदाबाद में हुआ, जहाँ कपड़ा मिलों के मजदूर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर
संघर्षरत थे।
प्रथम विश्व
युद्ध के बाद महँगाई बहुत बढ़ गई थी। मजदूरों ने अपने वेतन में 50 प्रतिशत वृद्धि
की मांग की, जबकि मिल मालिक
केवल 20 प्रतिशत बढ़ाने
को तैयार थे। इससे विवाद बढ़ा और मजदूरों ने शांतिपूर्ण हड़ताल शुरू की, जो आगे चलकर
भारतीय श्रमिक आंदोलनों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- वर्ष – 1918
- स्थान –
अहमदाबाद (गुजरात)
- नेतृत्व –
महात्मा गांधी, अनसूया साराभाई, शंकरलाल बैंकर
- आंदोलन का
स्वरूप – अहिंसक श्रमिक हड़ताल (औद्योगिक सत्याग्रह)
- अवधि –
लगभग 21 दिन
- मांग – 50
प्रतिशत वेतन वृद्धि
- परिणाम – 35
प्रतिशत वेतन वृद्धि पर समझौता
- महत्व –
औद्योगिक विवाद में सत्याग्रह का पहला प्रयोग
मुख्य तथ्य और प्रावधान
- विवाद की
पृष्ठभूमि
- प्रथम
विश्व युद्ध के दौरान वस्तुओं की कीमतें बहुत बढ़ गईं।
- मजदूरों
ने 50 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग की।
- मिल
मालिकों ने इंकार करते हुए तालाबंदी कर दी।
- महात्मा
गांधी की भूमिका
- गांधीजी
ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
- समझौते
की विफलता पर उन्होंने मजदूरों को शांतिपूर्ण हड़ताल के लिए प्रेरित किया।
- गांधीजी
ने कहा कि सत्य और अहिंसा से ही न्याय प्राप्त किया जा सकता है।
- गांधीजी
का उपवास
- जब मजदूर
निराश हो रहे थे, गांधीजी ने उपवास किया।
- उनके तीन
दिन के उपवास ने मजदूरों को एकजुट किया और आंदोलन को नैतिक शक्ति दी।
- इसने
पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।
- अनसूया
साराभाई का योगदान
- अनसूया
साराभाई ने मजदूरों को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभाई।
- वे बाद
में भारत की पहली महिला श्रमिक संघ नेतृ बनीं।
- समझौता और
परिणाम
- विवाद का
समाधान मध्यस्थता से हुआ।
- मजदूरों
को 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि मिली।
- आंदोलन
लगभग 21 दिनों बाद शांतिपूर्वक समाप्त हुआ।
- मजदूर
संगठन की स्थापना
- गांधीजी
ने 1918 में “अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन” (मजदूर महाजन
संघ) की स्थापना की।
- यह भारत
का पहला सफल श्रमिक संगठन बना, जो अहिंसा और सहयोग पर आधारित था।
महत्त्व
- यह
औद्योगिक विवाद में सत्याग्रह के प्रयोग का पहला उदाहरण था।
- इसने
सिद्ध किया कि आर्थिक न्याय अहिंसा के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
- गांधीजी
का नेतृत्व श्रमिक वर्ग में भी स्वीकार किया गया।
- मजदूरों
में एकता और आत्मसम्मान की भावना बढ़ी।
- मजदूर
महाजन संघ श्रमिक संगठनों का आदर्श बना।
- यह भारतीय
स्वतंत्रता संग्राम के साथ श्रमिक चेतना का भी प्रारंभ था।
सीमाएँ या आलोचनाएँ
- यह आंदोलन
क्षेत्रीय स्तर तक सीमित रहा।
- संरचनात्मक
आर्थिक सुधारों की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
- गांधीजी
के व्यक्तिगत नेतृत्व पर निर्भरता बनी रही।
- सफलता
मुख्यतः स्थानीय परिस्थितियों तक सीमित रही।
फिर भी,
यह आंदोलन
भारतीय श्रमिक आंदोलन की नैतिक और राजनीतिक प्रेरणा बन गया।
परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु
- वर्ष – 1918
- स्थान –
अहमदाबाद (गुजरात)
- मुख्य
नेता – महात्मा गांधी, अनसूया साराभाई, शंकरलाल बैंकर
- मांग – 50
प्रतिशत वेतन वृद्धि
- परिणाम – 35
प्रतिशत वेतन वृद्धि पर समझौता
- संगठन –
अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (1918)
- अवधि – 21
दिन
- महत्व –
श्रमिक आंदोलन में सत्याग्रह का प्रयोग
- गवर्नर –
सर जॉर्ज लॉयड (बॉम्बे प्रेसीडेंसी)
- स्वरूप –
अहिंसक, श्रमिक-आधारित आंदोलन
संक्षेप में
1918 की अहमदाबाद मजदूर हड़ताल भारत के श्रमिक आंदोलन की नींव
थी। गांधीजी के नेतृत्व में यह पहला औद्योगिक सत्याग्रह था जिसने अहिंसा और सत्य
के माध्यम से श्रमिकों को न्याय दिलाया।
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