पृष्ठभूमि
भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) भारत का पहला अखिल भारतीय राजनीतिक संगठन था जिसने ब्रिटिश
शासन के विरुद्ध भारतीयों को एक मंच पर संगठित किया। 1885 में ए. ओ. ह्यूम द्वारा
स्थापित इस संगठन ने क्रमशः सुधारवादी मांगों से लेकर पूर्ण स्वतंत्रता की दिशा
में आंदोलन का रूप लिया।
1885 से 1947
के बीच कुल 52 अधिवेशन हुए, जिन्होंने भारत
के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय की।
मुख्य तथ्य (सभी 52 अधिवेशन)
|
क्र. |
वर्ष |
स्थान |
अध्यक्ष |
प्रमुख
निर्णय / घटनाएँ |
|
1 |
1885 |
बॉम्बे |
डब्ल्यू. सी.
बनर्जी |
कांग्रेस की
स्थापना, 72 प्रतिनिधि उपस्थित |
|
2 |
1886 |
कलकत्ता |
दादाभाई
नौरोजी |
कांग्रेस के
उद्देश्य निर्धारित |
|
3 |
1887 |
मद्रास |
बदरुद्दीन
तैयबजी |
हिन्दू-मुस्लिम
एकता पर बल |
|
4 |
1888 |
इलाहाबाद |
जॉर्ज यूल |
पहले अंग्रेज
अध्यक्ष |
|
5 |
1889 |
बॉम्बे |
सर विलियम
वेडरबर्न |
प्रशासनिक
सुधारों पर चर्चा |
|
6 |
1890 |
कलकत्ता |
फिरोजशाह
मेहता |
भारतीय
प्रतिनिधित्व की मांग |
|
7 |
1891 |
नागपुर |
पी. आनंद
चार्लू |
परिषद
अधिनियम की समीक्षा |
|
8 |
1892 |
इलाहाबाद |
डब्ल्यू. सी.
बनर्जी |
1892 अधिनियम का
समर्थन |
|
9 |
1893 |
लाहौर |
दादाभाई
नौरोजी |
आर्थिक शोषण
पर चर्चा |
|
10 |
1894 |
मद्रास |
अल्फ्रेड वेब |
भारतीयों के
साथ एकजुटता |
|
11 |
1895 |
पुणे |
सुरेन्द्रनाथ
बनर्जी |
प्रशासनिक
सुधारों पर बल |
|
12 |
1896 |
कलकत्ता |
रहमतुल्ला
सयानी |
स्वदेशी
वस्तुओं के प्रयोग पर बल |
|
13 |
1897 |
अमरावती |
सी. शंकरन
नायर |
राष्ट्रवाद
पर चर्चा |
|
14 |
1898 |
मद्रास |
आनंद चार्लू |
जन-जागरण का
आह्वान |
|
15 |
1899 |
लखनऊ |
रोमेशचंद्र
दत्त |
ब्रिटिश
आर्थिक नीति की आलोचना |
|
16 |
1900 |
लाहौर |
एन. जी.
चंद्रावरकर |
शासन में
भारतीय प्रतिनिधित्व |
|
17 |
1901 |
कलकत्ता |
दिनशॉ वाचा |
प्रेस की
स्वतंत्रता पर चर्चा |
|
18 |
1902 |
अहमदाबाद |
सुरेन्द्रनाथ
बनर्जी |
राष्ट्रवाद
के प्रसार पर बल |
|
19 |
1903 |
मद्रास |
लालमोहन घोष |
प्रशासनिक
सुधारों की समीक्षा |
|
20 |
1904 |
बॉम्बे |
हेनरी कॉटन |
संगठन को
मजबूत करने पर बल |
|
21 |
1905 |
बनारस |
गोपालकृष्ण
गोखले |
बंगाल विभाजन
का विरोध |
|
22 |
1906 |
कलकत्ता |
दादाभाई
नौरोजी |
“स्वराज” की
पहली मांग |
|
23 |
1907 |
सूरत |
रश बिहारी
घोष |
नरम दल और
गरम दल का विभाजन |
|
24 |
1908 |
मद्रास |
डॉ. रश्मि
कुमार दत्त |
एकता की अपील |
|
25 |
1910 |
इलाहाबाद |
सर विलियम
वेडरबर्न |
राष्ट्रीय
एकता पर बल |
|
26 |
1911 |
कलकत्ता |
बिशन नारायण
धर |
राजधानी
दिल्ली स्थानांतरण |
|
27 |
1914 |
मद्रास |
बी. एन. धर |
ब्रिटिश
नीतियों की आलोचना |
|
28 |
1916 |
लखनऊ |
ए. सी.
मजुमदार |
कांग्रेस-मुस्लिम
लीग समझौता |
|
29 |
1917 |
कलकत्ता |
एनी बेसेंट |
होम रूल
आंदोलन का समर्थन |
|
30 |
1918 |
बॉम्बे |
पंडित मदन मोहन मालवीय |
सुधार
अधिनियम 1919 पर विचार |
|
31 |
1919 |
अमृतसर |
मोतीलाल
नेहरू |
जलियांवाला
बाग हत्याकांड की निंदा |
|
32 |
1920 |
नागपुर |
सी. आर. दास |
असहयोग
आंदोलन का प्रस्ताव |
|
33 |
1921 |
अहमदाबाद |
हाकिम अजमल
खाँ |
असहयोग की
प्रगति की समीक्षा |
|
34 |
1922 |
गया |
सी. आर. दास |
आंदोलन वापसी
के बाद मतभेद |
|
35 |
1923 |
दिल्ली |
मौलाना
मोहम्मद अली |
स्वराज
पार्टी का समर्थन |
|
36 |
1924 |
बेलगाम |
महात्मा
गांधी |
गांधीजी का
एकमात्र अध्यक्षीय अधिवेशन |
|
37 |
1925 |
कानपुर |
सरदार पटेल |
संगठन सुधार |
|
38 |
1926 |
मद्रास |
श्रीनिवास
अयंगर |
किसानों के
मुद्दों पर चर्चा |
|
39 |
1927 |
मद्रास |
एम. ए.
अंसारी |
साइमन कमीशन
बहिष्कार निर्णय |
|
40 |
1928 |
कलकत्ता |
मोतीलाल
नेहरू |
नेहरू
रिपोर्ट प्रस्तुत |
|
41 |
1929 |
लाहौर |
जवाहरलाल
नेहरू |
पूर्ण स्वराज
प्रस्ताव |
|
42 |
1931 |
कराची |
सरदार पटेल |
मौलिक अधिकार
और गांधी-इरविन समझौता |
|
43 |
1932 |
दिल्ली |
मदन मोहन
मालवीय |
गोलमेज़
सम्मेलन पर विचार |
|
44 |
1934 |
बॉम्बे |
राजेंद्र
प्रसाद |
प्रांतीय
चुनाव निर्णय |
|
45 |
1936 |
लखनऊ |
जवाहरलाल
नेहरू |
समाजवाद को
लक्ष्य घोषित |
|
46 |
1937 |
फैजपुर |
जवाहरलाल
नेहरू |
किसानों और
मजदूरों के मुद्दे |
|
47 |
1938 |
हरिपुरा |
सुभाष चंद्र
बोस |
राष्ट्रीय
योजना समिति गठन |
|
48 |
1939 |
त्रिपुरी |
राजेंद्र
प्रसाद |
बोस का
इस्तीफा |
|
49 |
1940 |
रामगढ़ |
मौलाना आजाद |
ब्रिटिश
युद्ध सहयोग से इनकार |
|
50 |
1942 |
बंबई |
आचार्य
कृपलानी |
भारत छोड़ो
आंदोलन प्रस्ताव |
|
51 |
1946 |
मेरठ |
जे. बी.
कृपलानी |
अंतरिम सरकार
में भागीदारी |
|
52 |
1947 |
दिल्ली |
जे. बी.
कृपलानी |
स्वतंत्र
भारत की नीति निर्धारण |
महत्त्व
- कांग्रेस
अधिवेशन भारत के राजनीतिक विकास का दर्पण हैं।
- इन बैठकों
ने स्वराज से लेकर पूर्ण स्वतंत्रता तक की यात्रा तय की।
- प्रमुख
प्रस्ताव – स्वराज (1906), पूर्ण स्वराज (1929), भारत छोड़ो (1942)।
- नेतृत्व
में निरंतर विकास – नौरोजी से गांधी, गांधी से नेहरू तक।
- लोकतांत्रिक
परंपराओं की नींव इन्हीं अधिवेशनों ने रखी।
सीमाएँ
- प्रारंभिक
अधिवेशन शिक्षित वर्ग तक सीमित रहे।
- आंतरिक
मतभेदों (1907, 1939) से संगठन कमजोर हुआ।
- ब्रिटिश
दमन के कारण कई प्रस्ताव लागू नहीं हो सके।
परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु
- कुल
अधिवेशन – 52
- पहला – 1885,
बॉम्बे, डब्ल्यू. सी. बनर्जी
- अंतिम
(स्वतंत्रता पूर्व) – 1947, दिल्ली, जे. बी. कृपलानी
- स्वराज की
मांग – 1906 (कलकत्ता)
- लखनऊ
समझौता – 1916
- असहयोग
आंदोलन – 1920 (नागपुर)
- पूर्ण
स्वराज – 1929 (लाहौर)
- मौलिक
अधिकार – 1931 (कराची)
- भारत
छोड़ो आंदोलन – 1942 (बंबई)
संक्षेप में
भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस के 52 अधिवेशन (1885–1947) स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा
हैं — याचना से संघर्ष और संघर्ष से स्वराज तक की कहानी।
Comments (0)
Leave a Comment