पृष्ठभूमि
भारतीय
राष्ट्रीय आंदोलन एक दीर्घकालिक संघर्ष था, जो लगभग छह दशकों तक चला।
यह आंदोलन धीरे-धीरे विकसित हुआ और भारतीय समाज की राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता
है। इसे तीन प्रमुख चरणों में बाँटा जाता है — नरमपंथी चरण (1885–1905),
गरमपंथी चरण (1905–1919)
और गांधीवादी चरण
(1919–1947)। इन तीनों चरणों का लक्ष्य एक ही था — भारत को ब्रिटिश
शासन से मुक्त कराना।
मुख्य तथ्य और प्रावधान
- नरमपंथी
चरण (1885–1905)
- भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए. ओ. ह्यूम ने की।
- प्रमुख
नेता: दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता,
सुरेन्द्रनाथ बनर्जी।
- इन्हें
“नरम दल” कहा गया।
- इनका
विश्वास संवैधानिक सुधारों और याचिका-नीति पर था।
- प्रमुख
मांगें — विधान परिषदों में भारतीयों की भागीदारी, राजस्व में कमी,
शिक्षा का प्रसार, प्रशासनिक सुधार।
- दादाभाई
नौरोजी का “धन की निकासी का सिद्धांत” (Drain Theory) राष्ट्रवाद का आधार
बना।
- गरमपंथी
चरण (1905–1919)
- आरंभ
बंगाल विभाजन (1905) से हुआ।
- प्रमुख
नेता: बाल गंगाधर तिलक, बिपिनचंद्र पाल, लाला लाजपत राय —
“लाल, बाल, पाल” के नाम से प्रसिद्ध।
- इनका
नारा था — “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
- स्वदेशी
वस्तुओं के प्रयोग और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया।
- तिलक ने
गणेशोत्सव और शिवाजी जयंती को जनजागरण के साधन बनाया।
- 1916
में लखनऊ समझौते से कांग्रेस के दोनों दलों और
मुस्लिम लीग में एकता आई।
- इस काल
में क्रांतिकारी गतिविधियों का भी विकास हुआ।
- गांधीवादी
चरण (1919–1947)
- नेतृत्व
महात्मा गांधी ने संभाला।
- उनके
सिद्धांत थे — अहिंसा और सत्याग्रह।
- प्रमुख
आंदोलन:
- असहयोग
आंदोलन (1920–22)
- सविनय
अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
- भारत
छोड़ो आंदोलन (1942)
- अन्य
प्रमुख घटनाएँ — जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919), डांडी यात्रा (1930),
राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस (1930–32)।
- सुभाष
चंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की भूमिका भी
निर्णायक रही।
- अंततः 15
अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
महत्त्व
- तीनों चरण
भारतीय राजनीतिक विचार के विकास को दर्शाते हैं — याचना से संघर्ष तक और फिर
जन-आंदोलन तक।
- राष्ट्रवाद
का प्रसार गाँव-गाँव तक हुआ, महिलाओं और किसानों की भागीदारी बढ़ी।
- गांधीजी
ने आंदोलन को नैतिक और आध्यात्मिक आधार दिया, जिससे यह विश्व-इतिहास
में अद्वितीय बन गया।
- स्वतंत्र
भारत के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ढाँचे की नींव इसी संघर्ष ने रखी।
सीमाएँ या आलोचनाएँ
- नरम दल की
नीतियाँ बहुत धीमी और नम्र मानी गईं।
- गरम दल
में संगठनात्मक एकता और दीर्घकालीन योजना की कमी थी।
- गांधीजी
के आंदोलन कई बार अचानक वापस ले लिए गए (जैसे चौरी-चौरा प्रकरण के बाद),
जिससे कुछ निराशा फैली।
परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु
- भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना — 1885
- बंगाल
विभाजन — 1905
- “स्वराज
मेरा जन्मसिद्ध अधिकार” — बाल गंगाधर तिलक
- लखनऊ
समझौता — 1916
- असहयोग
आंदोलन — 1920–22
- सविनय
अवज्ञा आंदोलन — 1930–34
- भारत
छोड़ो आंदोलन — 1942
- स्वतंत्रता
— 15 अगस्त 1947
- प्रमुख
नेता — दादाभाई नौरोजी, तिलक, लाजपत राय, बिपिनचंद्र पाल, गांधी, नेहरू,
सुभाष बोस।
संक्षेप में
- नरमपंथी
चरण (1885–1905): याचना और सुधार।
- गरमपंथी
चरण (1905–1919): स्वदेशी और बहिष्कार।
- गांधीवादी
चरण (1919–1947): अहिंसा और जन-आंदोलन — जिसने भारत को स्वतंत्रता
दिलाई।
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