पृष्ठभूमि

1917 का चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत में आयोजित पहला प्रमुख असहयोग आंदोलन था। यह गांधीजी की भारत की स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की शुरुआत थी और इसने सत्याग्रह (अहिंसक प्रतिरोध) के सिद्धांत को भारत की राजनीतिक चेतना का केंद्र बना दिया। यह आंदोलन बिहार के चंपारण जिले में हुआ, जहाँ अंग्रेजी नील किसानों द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा था।

किसानों को “तीनकठिया (3/20) प्रथा” के तहत अपनी भूमि का लगभग 15% हिस्सा जबरदस्ती नील की खेती के लिए देना पड़ता था। ब्रिटिश नील कारखाने किसानों को बहुत कम दाम पर खरीदने के लिए मजबूर करते थे। जब जर्मनी में कृत्रिम नील बनना शुरू हुआ और प्राकृतिक नील की मांग घट गई, तब भी अंग्रेज किसानों को नील की खेती करने को बाध्य करते रहे। गांधीजी के आगमन से किसानों को पहली बार अपनी आवाज मिली और उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सीखा।

चंपारण सत्याग्रह को भारत में गांधीजी के अहिंसक आंदोलन की पहली सफल प्रयोगशाला माना जाता है, जिसने आगे चलकर खेड़ा सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन की नींव रखी।


मुख्य तथ्य और प्रावधान

  1. शोषण की पृष्ठभूमि
    • अंग्रेज नील किसानों ने “टिंकठिया प्रथा” लागू कर किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर किया।
    • इससे खाद्यान्न उत्पादन घटा और गरीबी बढ़ी।
    • नील की वैश्विक मांग घटने के बावजूद ब्रिटिश किसानों का शोषण जारी रहा।
  2. महात्मा गांधी का आगमन
    • 1917 में स्थानीय किसान नेता राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर गांधीजी चंपारण पहुँचे।
    • अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें लौट जाने का आदेश दिया, पर उन्होंने इंकार किया।
    • गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से न्याय की मांग की।
  3. स्थानीय नेताओं की भूमिका
    • प्रमुख सहयोगी: राजेन्द्र प्रसाद, जे. बी. कृपलानी, मजहरुल हक, महादेव देसाई, नारहरि पारिख।
    • गांधीजी ने किसानों के बयान दर्ज कराए और शिक्षा व स्वच्छता सुधार पर बल दिया।
  4. सरकारी प्रतिक्रिया
    • ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
    • गांधीजी ने कहा कि वे दंड स्वीकार करेंगे लेकिन किसानों का साथ नहीं छोड़ेंगे।
    • यह भारत में उनका पहला नागरिक अवज्ञा आंदोलन था।
  5. जांच समिति का गठन
    • जनदबाव के कारण सरकार ने “चंपारण जांच समिति” बनाई।
    • गांधीजी इसमें सदस्य थे और समिति ने किसानों की शिकायतों को सही पाया।
    • सरकार ने नील किसानों की मजबूरी समाप्त करने का आदेश दिया।
  6. परिणाम
    • टिंकठिया प्रथा समाप्त हुई।
    • किसानों को आर्थिक और मानसिक राहत मिली।
    • ग्रामीण समाज में आत्मसम्मान और अधिकार की भावना जागी।
  7. सामाजिक सुधार
    • गांधीजी ने केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं चलाया बल्कि समाज सुधार पर भी बल दिया।
    • गाँवों में स्कूल, स्वच्छता अभियान और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित की गई।

महत्त्व

  1. चंपारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था।
  2. इसने स्वतंत्रता संग्राम को अभिजात वर्ग से जन-आंदोलन में बदल दिया।
  3. किसानों को अपने अधिकारों का बोध हुआ।
  4. गांधीजी को राष्ट्रीय नेतृत्व की मान्यता मिली।
  5. ग्रामीण समस्याएँ और किसानों की दुर्दशा राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विषय बनीं।
  6. यह अहिंसा और सत्य की शक्ति का प्रतीक बना।

सीमाएँ या आलोचनाएँ

  1. आंदोलन का क्षेत्र सीमित था (केवल चंपारण)।
  2. तत्कालीन भूमि सुधार या आर्थिक समस्याओं का समाधान सीमित रहा।
  3. भूमिहीन मजदूरों को सीधा लाभ नहीं मिला।
  4. अंग्रेज नील कारखाने बंद हुए, पर जमींदारों की निर्भरता जारी रही।

फिर भी यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नैतिक और राजनीतिक मोड़ था।


परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु

  1. वर्ष – 1917
  2. स्थान – चंपारण (बिहार)
  3. उद्देश्य – नील किसानों के शोषण का अंत
  4. नेतृत्व – महात्मा गांधी
  5. सहयोगी नेता – राजकुमार शुक्ल, राजेन्द्र प्रसाद, जे. बी. कृपलानी, महादेव देसाई
  6. परिणाम – तीन कठिया प्रथा समाप्त
  7. महत्व – गांधी युग की शुरुआत
  8. समिति – चंपारण जांच समिति (1917)
  9. गवर्नर – एडवर्ड गेट
  10. आंदोलन का स्वरूप – अहिंसक, किसान-आधारित, सुधारवादी

संक्षेप में

1917 का चंपारण सत्याग्रह भारत में गांधीजी के नेतृत्व में चलाया गया पहला अहिंसक आंदोलन था, जिसने नील किसानों को शोषण से मुक्ति दिलाई और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन में बदल दिया।