परिचय
वायु-प्रदूषण अब पर्यावरणीय समस्या मात्र नहीं रहा, बल्कि
भारत के विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहर-योजना
की केंद्रीय चुनौती बन गया है। संविधान के अनुच्छेद 21 में
जीवन के अधिकार के अंतर्गत स्वच्छ हवा का अधिकार निहित है। वहीं अनुच्छेद 48A
तथा 51-A(g) के माध्यम से राज्य और नागरिकों
दोनों को पर्यावरण-संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद अनेक महानगरों में
पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्मकणों का स्तर ऊँचा बना
हुआ है, जिससे जीवन-प्रत्याशा में कमी, बीमारियों में वृद्धि और
जीवन-गुणवत्ता में गिरावट हो रही है। इसी संदर्भ में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन
प्लान (GRAP) एक व्यवस्थित एवं समय-बद्ध तंत्र
है जो वायु-गुणवत्ता के बिगड़ने पर विभिन्न स्तरों पर कदम उठाने का मार्ग देता है।
इस लेख में हम GRAP की उत्पत्ति, वर्तमान स्थिति, कानूनी-नीति आधार, चुनौतियों व आगे की राह को विश्लेषित करेंगे।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
भारत में वायु-गुणवत्ता प्रबंधन पर प्रारंभ में ध्यान मानदंडों, उत्सर्जन-नियंत्रण तथा निगरानी-नेटवर्क पर केंद्रित था। परन्तु शहरों-विशेष
रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)-में मौसम, धूल-उत्सर्जन, क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट आदि के कारण
अचानक आने वाले धुंध-घेरों ने यह दिखाया कि केवल दीर्घ-कालीन उपाय पर्याप्त नहीं
हैं। NCR में शीतकालीन-धुंध, परिवहन-धूल व पराली(फसल के अवशेष)-जलने का संयोजन समस्या को जटिल
बनाता रहा। इन चुनौतियों के मद्देनजर दिल्ली-NCR हेतु
एक क्रमबद्ध प्रतिक्रिया तंत्र GRAP तैयार हुआ। यह तंत्र वायु
गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मूलक विभिन्न चरण
निर्धारित करता है, तथा प्रत्येक चरण में विभिन्न
नियंत्रण-उपाय सम्मिलित हैं। इस प्रकार GRAP पारंपरिक
नियम-आधारित मॉडल से हटकर समय-सापेक्ष सक्रिय मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसे बाद में वायु-गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा
क्रियान्वित किया गया।
वर्तमान परिदृश्य
अक्टूबर 2025 तक दिल्ली-NCR में वायु-गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई स्थानों पर AQI ‘बहुत खराब’ या ‘सख्त’ श्रेणी में गया है। उदाहरण के लिए, दिवाली से पहले दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में AQI 300 से ऊपर दर्ज हुआ, जिसके बाद GRAP-स्टेज-II सक्रिय किया गया। इस दौरान 12-बिंदु कार्रवाई योजना लागू हुई,
जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटर सेट पर
नियंत्रण और वाहनों की आवाजाही को सीमित करना शामिल था। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु
कार्यक्रम (NCAP) ने 131 शहरों
में पीएम कणों में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा
है, लेकिन समीक्षा से ज्ञात हुआ है कि अधिकांश शहर इस लक्ष्य से अभी दूर हैं। GRAP की सक्रियता दर्शाती है कि
तात्कालिक कार्यवाही आवश्यक है, किन्तु वह समस्या की जड़ों-पर
पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही है।
सरकारी नीतियाँ एवं कानूनी
प्रावधान
GRAP का नीतिगत व कानूनी आधार
निम्न-प्रकार से स्थापित है:
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,
1981 — केंद्र व राज्य प्रदूषण
नियंत्रण बोर्डों को वायु-प्रदूषण संबंधी मानदंड निर्धारित करने तथा नियंत्रण
उपाय लेने का अधिकार देता है।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 — पर्यावरण रक्षा हेतु राज्य को व्यापक शक्तियाँ देता है,
जिसके अंतर्गत GRAP-संदर्भित अधिसूचनाएँ जारी की जा सकती हैं।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), 2019
— 131 नगरीय-क्षेत्रों में पीएम2.5
व पीएम10 में 20-30 प्रतिशत तक कमी
लाने का शुरुआती लक्ष्य था, जिसे बाद में 2025-26 तक लगभग 40 प्रतिशत तक
संशोधित किया गया।
- GRAP
— दिल्ली-NCR के लिए AQI-आधारित चरण-आधारित
कार्रवाई तंत्र, जिसे CAQM द्वारा निष्पादित किया जाता है।
- संवैधानिक आधार — अनुच्छेद 48A और 51-A(g) के माध्यम से राज्य एवं नागरिकों को पर्यावरण-संरक्षण
की जिम्मेदारी मिली है।
इन नीतिगत-कानूनी तत्वों ने GRAP को केवल एक तात्कालिक
कार्रवाई तंत्र नहीं बल्कि पूरे वायु-गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र से जोड़ा हुआ बनाया
है।
चुनौतियाँ
- स्रोत-नियंत्रण की कमी – GRAP-मॉडल मुख्यतः प्रदूषण की तीव्र वृद्धि पर प्रतिक्रिया
करता है, परंतु वर्ष-पर्यन्त स्थिर
स्रोत-उत्सर्जन (वाहन-उत्सर्जन, निर्माण-धूल,
कृषि-जलना) को समुचित
प्राथमिकता नहीं देता।
- क्रियान्वयन एवं समन्वय की रुकावटें – निर्माणप्राधिकरण, स्थानीय निकाय, ट्रांसपोर्ट विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वय की कमी
क्रियान्वयन को धीमा करती है।
- मौसमी व क्षेत्रीय कारक – दिल्ली-NCR में पराली-जलना, धूल-उत्सर्जन, कम वायु-गति जैसे
कारणों से समस्या जटिल बनी हुई है, जिन्हें GRAP
अकेले नियंत्रित नहीं कर
सकता।
- अन्य शहरों में तंत्र का विस्तार – GRAP मॉडल दिल्ली-NCR हेतु तैयार हुआ है; अन्य प्रदूषित महानगरों में
उसे स्थानानुसार लागू करना आसान नहीं है।
- सामाजिक-आर्थिक असर – निर्माणबाधाएँ, वाहन-प्रतिबंध आदि से
दैनिक-वित्त-निर्भर श्रमिकों व छोटे व्यवसायों को प्रतिकूल प्रभाव उठाना पड़
सकता है।
- नागरिक सहभागिता की कमी –
स्व-वाहन-उपयोग, खुले जलने, सार्वजनिक परिवहन
उपयोग जैसे व्यवहारों को बदलना आवश्यक है; इसके बिना उपाय सीमित प्रभाव डालते हैं।
आगे की राह
- GRAP को केवल प्रतिक्रियात्मक तंत्र के रूप में नहीं,
बल्कि वर्ष-पर्यन्त
वायु-गुणवत्ता शासन मॉडल में रूपांतरित करना होगा, जिसमें पूर्व-अनुमान, स्रोत-नियंत्रण और सक्रिय
निगरानी शामिल हों।
- मल्टी-एजेंसी समन्वय को सशक्त करना होगा; इसके लिए एक केंद्रीकृत डेटा-डैशबोर्ड जरूरी है जिसमें
मौसम-पूर्वानुमान, उत्सर्जन-डेटा, निगरानी-निष्पादन सभी एकत्र हों।
- NCAP के अंतर्गत अन्य शहरों में स्थानीय-अनुकूल ग्रेडेड
कार्रवाई योजनाएँ विकसित की जाएँ, ताकि GRAP-मॉडल का विस्तार हो सके।
- स्रोत-उत्सर्जन पर विशेष फोकस करें — स्वच्छ-वाहन,
सार्वजनिक परिवहन विस्तार,
निर्माण-धूल प्रबंधन, कृषि-पराली-प्रबंधन जरूरी हैं।
- अर्थ-न्याय सुनिश्चित करें — जब निर्माण अथवा वाहन
प्रतिबंध लगे हों, तब प्रभावित श्रमिकों व
व्यवसायों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी
चाहिए।
- नागरिक सहभागिता एवं व्यवहार परिवर्तन के लिए
जागरूकता-प्रसार, विद्यालय-स्तरीय कार्यक्रम,
सार्वजनिक-डेटा पुश करना
होगा।
- GRAP-क्रियान्वयन का नियमित समीक्षा-तंत्र स्थापित हो
जिसमें निष्पादन-मूल्यांकन, निष्कर्ष, सीख एवं सुधार-सुझाव शामिल हों।
परीक्षा दृष्टि से महत्व
प्रारंभिक परीक्षा हेतु
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) 2019-लॉन्च, 131 नगरीय-क्षेत्र,
पीएम10 में 40 % तक कमी लक्ष्य तक 2025-26.
- GRAP-स्टेज-II की घोषणा अक्टूबर 2025
में दिल्ली-NCR में AQI >300 पर।
- कानूनी आधार – वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण)
अधिनियम 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986.
- GRAP में AQI-आधारित चरण-मानदंड
(उदाहरण-201-300, 301-400)।
- 12-बिंदु कार्रवाई योजना GRAP-Stage-II में NCR के लिए।
- अध्ययन-डेटा: भारत में पीएम2.5 प्रदूषण के कारण औसत जीवन-उम्मीद लगभग 5 वर्ष तक कम।
- GRAP सक्रियता-अभ्यास NCR में नियमित।
मुख्य परीक्षा हेतु
- GRAP मॉडल: पर्यावरण-पॉलिसी में अनुकूलन-शासन का उदाहरण।
- स्थानीय/क्षेत्रीय स्रोत, मौसम तथा टेक्नोलॉजी-समन्वय की चुनौतियाँ।
- संस्थागत व्यवस्था: CAQM, नगर-निकाय, प्रदूषण-नियंत्रण बोर्ड,
डेटा-शेयरिंग मॉडल।
- न्याय-विकास संतुलन: स्वास्थ्य-लाभ, आर्थिक-विकास व सामाजिक-न्याय का समन्वय।
- केस-अध्ययन: अक्टूबर 2025 दिल्ली-NCR वायु-गुणवत्ता स्पाइक,
GRAP-Stage-II क्रियान्वयन।
- नागरिक-भागीदारी व व्यवहार-परिवर्तन का महत्व।
साक्षात्कार हेतु
- GRAP यह संकेत देता है कि पर्यावरणीय नीति केवल नियम-नियमन
से आगे बढ़कर अवस्थागत प्रतिक्रिया-तंत्र की ओर बढ़ रही है।
- GRAP तभी सफल होगा जब केवल तत्काल कार्रवाई न हो बल्कि
स्रोत-उत्सर्जन, ट्रांसपोर्ट व कृषि-प्रथाओं
में समग्र सुधार हो।
- नागरिकों को सिर्फ ‘‘अनुपालनकर्ता’’ नहीं बल्कि
‘‘सह-परिवर्तक’’ बनना होगा; स्व-वाहन उपयोग घटाना,
खुले जलने से परहेज करना आदि
व्यवहार-परिवर्तन आवश्यक हैं।
- भविष्य में GRAP-मॉडल अन्य पर्यावरण-नीति श्रेणियों में भी अपनाया जा सकता है—उदाहरण-शहरी
गर्मी-लहर, बाढ़-प्रबंधन, शहर-जल-प्रदूषण आदि।
संक्षेप में
GRAP ने दिल्ली-NCR में वायु-प्रदूषण की तीव्र चुनौतियों के प्रति एकार्यात्मक, चरण-आधारित और जवाबदेह उपाय प्रस्तुत किए हैं। फिर भी, स्थायी
स्वच्छ-हवा सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि यह केवल ‘‘रोक-थाम’’ तंत्र न
रहकर समग्र वायु-गुणवत्ता शासन मॉडल में बदल जाए जिसमें स्रोत-नियंत्रण, व्यवहार-परिवर्तन, समन्वित क्रियान्वयन तथा
सामाजिक-न्याय का समावेश हो।
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