प्रस्तावना
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में नागरिकों की भागीदारी नीति निर्माण की आत्मा मानी जाती है। भारतीय संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि शासन केवल सरकार का कार्य नहीं बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही लोकतंत्र जीवंत बनता है। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान इसी दृष्टिकोण पर आधारित एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य जनता की सोच सुझाव और आकांक्षाओं को राज्य की नीतियों में सम्मिलित करना है। यह पहल भारत के विकसित भारत@2047 लक्ष्य के अनुरूप है और उत्तर प्रदेश को एक समावेशी प्रगतिशील और ज्ञान आधारित राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर करती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्वतंत्रता के बाद भारत ने प्रतिनिधिक लोकतंत्र अपनाया जहाँ जनता की भागीदारी मुख्यतः चुनावों तक सीमित थी। लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि विकास के लिए केवल चुनाव पर्याप्त नहीं हैं। 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भागीदारी को संवैधानिक मान्यता दी। इसके पश्चात मायगव मंच आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम और सार्वजनिक प्रतिक्रिया प्रणालियाँ इस प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक बनीं।
इसी क्रम में विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान आरंभ किया गया है जिसका उद्देश्य अगले दो दशकों के लिए राज्य की विकास दिशा तय करना है। यह अभियान राष्ट्रीय स्तर के विकसित भारत@2047 दृष्टिकोण के अनुरूप है जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना करता है। उत्तर प्रदेश जिसकी जनसंख्या देश में सर्वाधिक है इस लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

वर्तमान परिदृश्य
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस अभियान के तहत शिक्षा स्वास्थ्य कृषि उद्योग अवसंरचना पर्यावरण और प्रशासनिक सुधार जैसे क्षेत्रों में व्यापक परामर्श कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिलास्तर पर कार्यशालाएँ युवाओं के साथ संवाद शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता और ऑनलाइन सर्वे के माध्यम से नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
अभियान के तहत राज्य का विजन दस्तावेज तैयार किया जा रहा है जिसमें आर्थिक विकास रोजगार सृजन शहरी और ग्रामीण संतुलन हरित ऊर्जा सतत कृषि और डिजिटल शासन को प्राथमिकता दी गई है। नागरिकों को नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करना पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सरकारी नीतियाँ और संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 38 में राज्य को जनता के कल्याण हेतु न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।

  • अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के रूप में सशक्त करने का प्रावधान है।

  • 73वां और 74वां संशोधन स्थानीय शासन और नागरिक भागीदारी को संस्थागत रूप प्रदान करता है।

  • प्रशासनिक स्तर पर मायगव मंच ई गवर्नेंस मिशन और सामाजिक सहभागिता नीति जैसी पहलें नागरिकों को नीति निर्माण में शामिल करती हैं।

  • उत्तर प्रदेश में जन सुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएँ सरकार और जनता के बीच संवाद को प्रोत्साहित करती हैं।

  • विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान इन्हीं ढाँचों को डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित नीति निर्माण से जोड़ता है।

मुख्य चुनौतियाँ

  • ग्रामीण और वंचित वर्गों की सीमित पहुँच नीति परामर्श में असमानता पैदा करती है।

  • नागरिकों में नीति प्रक्रिया के प्रति जागरूकता का अभाव सक्रिय भागीदारी को सीमित करता है।

  • नौकरशाही स्तर पर समन्वय की कमी और प्रक्रियागत देरी सुझावों के क्रियान्वयन में बाधा बनती है।

  • डिजिटल विभाजन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक ऑनलाइन मंचों तक नहीं पहुँच पाते।

  • नागरिक सुझावों के प्रभाव का मूल्यांकन करने की संस्थागत व्यवस्था अभी विकसित हो रही है।

  • विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय बनाए रखना एक जटिल कार्य है।

आगे की राह

  • ग्राम और जिला स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को नीति प्रक्रिया से जोड़ना।

  • स्थानीय संस्थाओं और स्वैच्छिक संगठनों को नागरिकों और शासन के बीच सेतु के रूप में सशक्त करना।

  • डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर ऑनलाइन परामर्श में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना।

  • नागरिक सुझावों की समीक्षा और उनके अनुपालन की नियमित व्यवस्था बनाना।

  • तकनीक आधारित डैशबोर्ड और मोबाइल एप के माध्यम से प्रगति की निगरानी करना।

  • युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से राज्य के विकास में साझेदार बनाना।

परीक्षा के लिए महत्व

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान 2024 में प्रारंभ हुआ।

  • यह विकसित भारत@2047 लक्ष्य के अनुरूप है।

  • राज्य योजना विभाग और नीति आयोग इस अभियान के प्रमुख सहयोगी हैं।

  • अनुच्छेद 38 और 40 नागरिक सहभागिता से संबंधित हैं।

  • 73वां और 74वां संशोधन स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करता है।

  • मायगव मंच 2014 में नागरिक सहभागिता हेतु शुरू हुआ।

  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम भागीदारी आधारित शासन का उदाहरण है।

  • मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जन सुनवाई जैसी पहलें लोक शिकायत निवारण में सहायक हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु विश्लेषणात्मक बिंदु

  • यह अभियान सहभागी शासन और सहकारी संघवाद का उदाहरण है।

  • यह पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाता है।

  • यह नागरिकों के सुझावों को नीति निर्माण का हिस्सा बनाता है।

  • यह स्थानीय आकांक्षाओं को राज्य विकास नीति से जोड़ता है।

  • यह उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सहभागी प्रशासन का व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करता है।

  • यह संविधान की सहभागी लोकतंत्र की अवधारणा को सशक्त करता है।

साक्षात्कार हेतु बिंदु

  • नागरिक भागीदारी शासन की वैधता और प्रभावशीलता को बढ़ाती है।

  • जनता के सुझाव नीति निर्णयों को अधिक यथार्थवादी बनाते हैं।

  • डिजिटल सहभागिता सरकार और समाज के बीच की दूरी कम कर सकती है।

  • विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान की सफलता नागरिकों की निरंतर भागीदारी पर निर्भर करेगी।

संक्षेप में
नीति निर्माण में नागरिकों की भागीदारी सुशासन का मूल तत्व है। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 अभियान राज्य सरकार की वह पहल है जो जनता को विकास यात्रा का सहभागी बनाती है। यदि यह प्रक्रिया जागरूकता समावेशन और संस्थागत निरंतरता के साथ आगे बढ़ती है तो उत्तर प्रदेश 2047 तक एक विकसित और सशक्त राज्य के रूप में उभर सकता है।