परिचय
भारतीय संघवाद का मुख्य स्वरूप केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों और जिम्मेदारियों के संतुलन में है। डिजिटल युग में, राज्य-केंद्रित डिजिटल अवसंरचना संघीय सिद्धांतों को गहराई देने की एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। डेटा-आधारित प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी नीति-निर्माण के मार्ग खोलता है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 1, 246 और सातवें अनुसूची, जो शक्तियों का वितरण तय करते हैं, के अनुरूप प्रौद्योगिकी को क्षेत्रीय स्तर पर बराबर अपनाने की आवश्यकता पर जोर देती है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
भारत में डिजिटल सशक्तिकरण की यात्रा 1990 के दशक के अंत में ई-गवर्नेंस पहलों से आरंभ हुई, जो नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान (NeGP), डिजिटल इंडिया मिशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे महत्वपूर्ण बदलावों के साथ आगे बढ़ी। आरंभिक रूप से अधिकांश नीतियां तकनीकी व्यवस्था को केंद्रित रखती थीं, परंतु राज्य डेटा केंद्रों, SWANs और डिजिटल मिशन जैसी दलगत पहलें राज्यों को संसाधन और तकनीकी स्वायत्तता देने लगी हैं। प्रतिस्पर्धी संघवाद के परिणामस्वरूप कर्नाटक, केरल, तेलंगाना जैसे राज्य कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं नगरीय नियोजन क्षेत्रों में क्षेत्रीय डिजिटल समाधान आगे बढ़ा रहे हैं।
वर्तमान परिदृश्य
वर्तमान में भारत की संघीय डिजिटल अवसंरचना 1.3 अरब नागरिकों को सेवाएं देती है एवं हर माह 10 अरब से अधिक लेनदेन संभालती है। 300 से अधिक सरकारी विभाग क्लाउड सेवाएं अपना रहे हैं, जबकि विभिन्न राज्य लोक सेवाओं के लिए विशिष्ट प्लेटफॉर्म डिज़ाइन कर रहे हैं। कोविड-19 के दौरान राज्य सरकारों ने रियल-टाइम डैशबोर्ड, ई-विश्लेषण प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय भाषा ऐप्स जैसी तकनीकों को अपनाया। मुख्य समाचार पत्रों और सरकारी रिपोर्टों में आधार आधारित सेवा वितरण, राज्य ई-गवर्नेंस क्लाउड एवं डेटा-आधारित संघीय सहयोग के सफल उदाहरण आए हैं।
सरकारी नीतियां एवं कानूनी प्रावधान
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डिजिटल इंडिया मिशन नागरिकों हेतु डिजिटल अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित करता है।
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राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड योजना व भारतनेट परियोजना ग्रामीण राज्यों को अंतिम छोर तक संयोजित करती है।
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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (संशोधन 2008) डिजिटल शासन को विनियमित करता है, जिसे राज्यीय आईटी नीतियां भी समर्थन देती हैं।
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UIDAI व NPCI: सांविधिक स्वतंत्रता और बहु-स्टेकहोल्डर प्रशासन के उदाहरण।
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राज्य डेटा नीति फ्रेमवर्क विकेंद्रीकृत डेटा प्रबंधन व सुरक्षा को बढ़ावा देता है, जो व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक (2023) से मेल खाते हैं।
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केंद्र सरकार ओपन APIs, इंटरऑपरेबिलिटी व मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म को प्रोत्साहित करती है ताकि राज्य-स्तरीय अनुकूलता बनी रहे।
चुनौतियां / मुद्दे
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संसाधन असमानता: कई राज्यों को पर्याप्त फंडिंग और कुशल मानव संसाधन की कमी है।
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डेटा सिलो और विखंडन: मानकीकरण की कमी व सीमित डेटा साझेदारी से अखिल भारतीय दृष्टिकोण प्रभावित होता है।
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साइबर सुरक्षा व गोपनीयता: विस्तृत डिजिटल प्लेटफार्म साइबर उल्लंघनों की संभावना बढ़ाते हैं।
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क्षमता व कौशल अंतर: पिछड़े एवं ग्रामीण राज्यों में प्रशिक्षण एवं जागरूकता की कमी।
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अंतर-सरकारी समन्वय: अलग-अलग नीति प्राथमिकता एवं सीमित डेटा इंटरऑपरेबिलिटी।
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राजनीतिक व प्रशासनिक प्रतिरोध: प्रचलित प्रणालियों व जोखिम से बचाव के कारण धीमी गति।
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समानता व समावेशन: महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति व दूरस्थ क्षेत्रों को लाभ पहुँचाने हेतु लक्षित नीति जरूरी।
आगे की राह
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राज्य डिजिटल मिशनों को सशक्त करें: तकनीकी और वित्तीय समर्थन विकेंद्रीकरण।
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इंटरऑपरेबल डेटा इकोसिस्टम को बढ़ावा दें: राष्ट्रीय मानकों व राज्य स्वायत्तता में संतुलन।
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डिजिटल साक्षरता का विस्तार: प्रशिक्षण, जागरूकता, समावेशन।
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सुरक्षा व गोपनीयता को मजबूत करें: साइबर सुरक्षा अपग्रेड व कानूनी सुरक्षा।
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सहयोग को प्रोत्साहित करें: प्रदर्शन आधारित अनुदान व पुरस्कार।
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नीति प्रयोग (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स): राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान विकसित करने की छूट।
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समीक्षा व मूल्यांकन: नियमित और पारदर्शी मूल्यांकन तंत्र।
परीक्षा के लिए महत्व
प्रिलिम्स:
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2006: नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान।
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2014: डिजिटल इंडिया मिशन।
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भारतनेट परियोजना।
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आईटी एक्ट, 2000; संशोधन 2008।
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UIDAI, NPCI।
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राज्य डेटा केंद्र व SWANs।
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व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक (2023)।
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संविधान की सातवीं अनुसूची।
मेनस:
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कोविड-19 में राज्य आधारित डिजिटल डैशबोर्ड की भूमिका।
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केस स्टडी: केरल का ई-हेल्थ प्लेटफार्म, तेलंगाना की टी-फाइबर ब्रॉडबैंड।
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राज्यों में डिजिटल अवसंरचना की असमानता।
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भारतनेट के माध्यम से ग्रामीण-व урबन एकीकरण।
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बहस: केंद्रीय निगरानी बनाम राज्य नवाचार।
इंटरव्यू:
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राज्य-केंद्रित डिजिटल अवसंरचना संघीयता में पारदर्शिता व समावेशन बढ़ा सकती है।
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समन्वित, इंटरऑपरेबल सिस्टम दक्षता बढ़ाते हैं, लेकिन गोपनीयता व समानता पर ध्यान जरूरी।
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अग्रणी राज्य अन्य राज्यों के लिए मॉडल प्रस्तुत करते हैं—नीति में संसाधन व कौशल विषमता का समाधान आवश्यक।
संक्षेप में
मजबूत राज्य-केंद्रित डिजिटल अवसंरचना भारत के संघीय ढांचे को सशक्त, सेवा वितरण सरल और स्थानीय नवाचार को समर्थ बनाती है। इसके पूर्ण लाभ हेतु, समान पहुँच, डेटा सुरक्षा और सहयोगी शासन पर सतत ध्यान देना जरूरी है।
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