परिचय

जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के तकनीकी बदलावों में एक क्रांतिकारी पहल है। मोटे तौर पर, जेनरेटिव एआई वे एल्गोरिदम हैं जो बड़े डेटा सेट से सीखकर स्वतःस्फूर्त रूप में नया कंटेंट तैयार करने में सक्षम हैं—चाहे वह पाठ हो, छवि हो, ऑडियो या वीडियो। नवाचार को बढ़ावा देते हुए नैतिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत के संविधानिक आदर्शों—न्याय, समानता और समावेशी विकास—से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है। जैसे ही भारत एक ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था और समावेशी तकनीकी नेतृत्व का लक्ष्य निर्धारित करता है, नागरिक अधिकारों, सामाजिक समावेश और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में जेनरेटिव एआई के लाभ व जोखिम का मूल्यांकन अनिवार्य है।


पृष्ठभूमि व संदर्भ

भारत का डिजिटल परिदृश्य दशक-दर-दशक नीतिगत विकास के साथ आगे बढ़ा है—सन् 1970 के दशक में नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की स्थापना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, “डिजिटल इंडिया” व “स्टार्टअप इंडिया” जैसी पहलें। वर्ष 2017 के बाद से नीति आयोग ने “एआई फॉर ऑल” अभियान, रणनीतिक रोडमैप और डिजिटल समावेशन के लिए विशेष योजनाएं शुरू कीं। सामान्यत: भारत ने तकनीकी नवाचार को जन सशक्तिकरण के केंद्र में रखा है। जेनरेटिव एआई खासतौर से GANs और LLMs जैसी उच्च स्तरीय मॉडल्स द्वारा रचनात्मक आउटपुट, सिंथेटिक मीडिया और डीपफेक कंटेंट की सृजन क्षमता रखते हैं—जो नैतिकता की दृष्टि से नई चुनौतियां प्रस्तुत करता है।


वर्तमान परिदृश्य

भारतीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों में जेनरेटिव एआई को अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 74% एआई-फोकस्ड भारतीय स्टार्टअप्स ने जेनरेटिव एआई को अपनाया है, और इनमें से अधिकांश 2021 के बाद स्थापित हुई हैं। सितंबर 2025 के IPSOS सर्वे में 71% भारतीयों ने एआई उत्पादों के प्रति सकारात्मक रुख जताया है। हेल्थकेयर, प्रशासन, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में जेनरेटिव एआई बुनियादी बदलाव ला रहा है। हालांकि, डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट के कारण गोपनीयता, विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास पर जोखिम बढ़ा है। अखबारों व सरकारी पोर्टलों में नियमित रूप से रोजगार, गलत जानकारी और एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह की चर्चा होती है।


सरकारी नीतियां व कानूनी प्रावधान

भारत ने व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक समेत AI से जुड़े नियमों का प्रारूप तैयार किया है। नीति आयोग व इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क के विकास हेतु प्रयासरत हैं। वर्ष 2020 में लॉन्च हुई RAISE पहल का उद्देश्य सामाजिक समावेशन के लिए नैतिक AI मानक स्थापित करना है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (संशोधित), संविधान की अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) व अनुच्छेद 51A (वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा) जैसी प्रावधान भी लागू हैं। भारत वैश्विक मंचों पर जिम्मेदार AI के लिए सहयोग करता है और अंतरराष्ट्रीय गवर्नेंस के निर्माण में सक्रिय योगदान देता है।


चुनौतियां / मुद्दे

  1. डेटा गोपनीयता और संरक्षण: बड़े डेटा सेटों की आवश्यकता के कारण, अप्राधिकृत डेटा उपयोग और डेटा ब्रीच का खतरा बढ़ता है, विशेषकर कमजोर कानून प्रवर्तन के चलते।

  2. पूर्वाग्रह व निष्पक्षता: एल्गोरिदम में सांस्कृतिक, सामाजिक या भाषाई पूर्वाग्रह आ सकते हैं, जो असमानता या गलत प्रतिनिधित्व को बढ़ा सकते हैं।

  3. डीपफेक व गलत जानकारी: एआई जनित फेक कंटेंट से सार्वजनिक विश्वास व चुनावी प्रक्रिया पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

  4. बौद्धिक संपदा अधिकार: कंटेंट के लिए AI ट्रेनिंग में कॉपीराइटेड सामग्री का उपयोग कानूनी व नैतिक विवाद उत्पन्न करता है।

  5. अवसंरचना और डिजिटल डिवाइड: उन्नत AI हेतु आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधन व इंटरनेट का अभाव ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा है।

  6. कौशल और मानव संसाधन: AI विशेषज्ञों की कमी के चलते, शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश जरूरी है।

  7. नियमन और निगरानी: तकनीकी नवाचार की गति कानून व्यवस्था से तेज है, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता में गैप पैदा होता है।

आगे की राह

  1. डेटा गवर्नेंस को मजबूत करना: पारदर्शिता, सहमति और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु व्यापक कानून लागू करना।

  2. समावेशी एआई को बढ़ावा देना: सभी भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधताओं को प्रतिनिधित्व देने वाले AI मॉडल विकसित करना।

  3. सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना: डिजिटल साक्षरता, जिम्मेदार AI उपयोग और नैतिक मुद्दों पर जन संवाद।

  4. अवसंरचना और कौशल विकास: कंप्यूटिंग अवसंरचना, शोध व शिक्षा में निवेश।

  5. रेगुलेटरी सैंडबॉक्सिंग: पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिये AI फ्रेमवर्क का परीक्षण।

  6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक AI मानकों के विकास में भारत की सक्रिय भागीदारी।

परीक्षा की दृष्टि से महत्व

प्रिलिम्स के लिए:

  • 2017: नीति आयोग द्वारा एआई रणनीति जारी।

  • 2020: RAISE पहल की शुरुआत।

  • व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक (2023 का मसौदा)।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY): संचालन एजेंसी।

  • GANs, LLMs: तकनीकी शब्दावली।

  • अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार)।

  • आईटी एक्ट, 2000।

  • GPAI (Global Partnership on AI) में भारत की भूमिका।

मेन के लिए:

  • केस स्टडी: भारतीय स्कूलों में एआई आधारित वर्चुअल ट्यूटर का प्रयोग।

  • बहस: नवाचार और जोखिम संतुलन हेतु एआई आधारित स्वास्थ्य सेवा।

  • उदाहरण: भारत में डीपफेक की घटनाएं व नियामक उत्तर।

  • विश्लेषण: डिजिटल डिवाइड और जेनरेटिव एआई का प्रभाव।

  • नीति: एआई नैतिकता हेतु नीति आयोग का परामर्शी दृष्टिकोण।

इंटरव्यू के लिए:

  • जेनरेटिव एआई रोजगार, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्रों में अपार संभावनाएं रखता है, लेकिन नैतिक सुरक्षा अनिवार्य है।

  • भारत का भविष्य समावेशिता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ नवाचार को संतुलित करने में निहित है।

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग जिम्मेदार एआई फ्रेमवर्क निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण रहेगा।

संक्षेप में

जेनरेटिव एआई भारत में नवाचार व नैतिक जवाबदेही के मुहाने पर है। प्रभावी प्रशासन, समावेशी नीति और साझेदारी से एआई का जनहित में सदुपयोग और अधिकारों की सुरक्षा संभव है।