प्रस्तावना
ऊर्जा सुरक्षा भारत के विकास और संवैधानिक दृष्टिकोण का प्रमुख स्तंभ रही है। राज्य के नीति निदेशक तत्व संसाधनों के न्यायपूर्ण और सतत उपयोग पर बल देते हैं, ताकि जनता के कल्याण के लिए स्थायी ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इसी परिप्रेक्ष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं। ये रिएक्टर स्वच्छ ऊर्जा, सुरक्षा और लचीलापन तीनों को एक साथ सुनिश्चित करते हैं। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है, ऐसे में SMR इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्वतंत्रता के बाद भारत ने 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की और डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में परमाणु कार्यक्रम आरंभ किया। भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों में विकसित हुआ – प्राकृतिक यूरेनियम, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और थोरियम आधारित रिएक्टर। वर्तमान में उपयोग में आने वाले बड़े रिएक्टर जैसे प्रेसराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर (PHWR) और बॉयलिंग वाटर रिएक्टर (BWR) ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख साधन हैं, परंतु इनकी लागत अधिक, निर्माण अवधि लंबी और सुरक्षा अवसंरचना जटिल होती है।
छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर इन सीमाओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। इनकी प्रति इकाई क्षमता 300 मेगावॉट से कम होती है। इन्हें कारखाने में बनाया जाता है और फिर साइट पर ले जाकर स्थापित किया जा सकता है। यह लचीलापन और चरणबद्ध विस्तार की सुविधा प्रदान करता है। अमेरिका, रूस, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में SMR परियोजनाएँ चल रही हैं, जो भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का हिस्सा बन चुकी हैं।
वर्तमान परिदृश्य
2025 तक भारत में 23 परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 7480 मेगावॉट है। एनपीसीआईएल का लक्ष्य 2031 तक इस क्षमता को 22,000 मेगावॉट तक बढ़ाने का है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की डिजाइन और तकनीकी संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के अंतर्गत SMR विकास और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर 80 से अधिक SMR डिजाइन विकासाधीन हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इन्हें भविष्य की ऊर्जा प्रणाली का महत्वपूर्ण घटक माना है। भारत के लिए ये रिएक्टर दूरदराज इलाकों, छोटे औद्योगिक क्षेत्रों और हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयों के लिए अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं।
सरकारी नीतियाँ और कानूनी प्रावधान
भारत का परमाणु क्षेत्र परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के अंतर्गत संचालित होता है और इसका नियमन परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) करता है। नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम 2010 परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में उत्तरदायित्व तय करता है। भारत अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा सम्मेलन का भी सदस्य है।
SMR विकास मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और ऊर्जा संक्रमण रोडमैप जैसी सरकारी पहलों से जुड़ा हुआ है। सरकार निजी क्षेत्र को गैर-नाभिकीय घटकों जैसे डिजाइन, निर्माण और प्रबंधन में भागीदारी की अनुमति देने की दिशा में विचार कर रही है। इससे नवाचार और लागत नियंत्रण दोनों में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ और समस्याएँ
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प्रारंभिक पूंजी निवेश और लंबी परियोजना अवधि से वित्तीय व्यवहार्यता प्रभावित होती है।
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परमाणु सुरक्षा के प्रति जनता में अभी भी अविश्वास बना हुआ है।
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अपशिष्ट प्रबंधन और दीर्घकालीन भंडारण की समस्या बनी हुई है।
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दायित्व अधिनियम के कारण निजी निवेशक संकोच करते हैं।
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प्रशिक्षित मानव संसाधन और तकनीकी कौशल की कमी।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर SMR मानकीकरण का अभाव जिससे निर्यात सीमित है।
आगे की राह
भारत को तकनीकी नवाचार, सुरक्षा और जनविश्वास के संतुलन पर आधारित रणनीति अपनानी चाहिए।
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पायलट परियोजनाओं को सरकारी निवेश से शुरू किया जाए ताकि तकनीकी व्यवहार्यता सिद्ध हो सके।
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सुरक्षा, अपशिष्ट प्रबंधन और दायित्व पर स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देश बनाए जाएँ।
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अनुसंधान एवं विकास के लिए DAE, NPCIL, NTPC और शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग बढ़ाया जाए।
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परमाणु ऊर्जा के लाभ और सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
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SMR को नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयों से जोड़ा जाए।
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एक स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना की जाए जो पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाए।
परीक्षा के लिए महत्व
प्रीलिम्स के लिए
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परमाणु ऊर्जा अधिनियम – 1962
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नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम – 2010
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वर्तमान परमाणु क्षमता – लगभग 7480 मेगावॉट (2025)
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लक्ष्य – 22,000 मेगावॉट (2031)
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एनपीसीआईएल – वाणिज्यिक रिएक्टर संचालन संस्था
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र – अनुसंधान संस्था
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नेट-जीरो लक्ष्य – 2070
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आईएईए – वैश्विक परमाणु सुरक्षा संगठन
मेंस के लिए
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SMR भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में कैसे सहायक हो सकते हैं
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SMR बनाम पारंपरिक रिएक्टर की आर्थिक व्यवहार्यता
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परमाणु दायित्व ढांचे की सीमाएँ और सुधार की आवश्यकता
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क्षेत्रीय ऊर्जा समानता में SMR की भूमिका
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जनविश्वास और पारदर्शिता का महत्व
साक्षात्कार के लिए
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SMR तकनीक सुरक्षा और सततता दोनों को जोड़ती है।
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भारत का SMR दृष्टिकोण ऊर्जा परिवर्तन का व्यावहारिक समाधान है।
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परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा के संयोजन से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
संक्षेप में
छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं का संतुलन स्थापित कर सकते हैं। यदि इनका विकास नीति, प्रौद्योगिकी और जनविश्वास के साथ हो तो भारत स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व का केंद्र बन सकता है।
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